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Terms and conditions for farmers

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Our Products & Services / Govt Plan

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

A कृषि विभाग द्वारा संचालित कृषकोन्मुखी योजनाऐं
I. केन्द्र प्रवर्तित/केन्द्र क्षेत्रीय/विशेष केन्द्रीय सहायता योजनाऐं

1. नेशनल मिशन आन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन टेक्नालाॅजी (NMAET)

i. सब मिशन आन एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन (SMAE)-
एक्सटेंशन रिफाॅम्र्स (आत्मा)

योजना का उद्देश्य कृषि एवं समवर्गी क्षेत्र उद्यानिकी, पशुपालन, वानिकी, रेशमपालन, सहकारिता विभाग, कृषि विश्वविद्यालय एवं स्वयं सेवी संस्था, एग्रीक्लिनिक, एग्रीबिजनेस सेंटर, कार्पोरेट्स एवं इनपुट डीलर्स इत्यादि की सहभागिता एवं समन्वय द्वारा कृषकों का समग्र विकास करना।
हितग्राही की पात्रता सभी वर्ग के कृषकों हेतु परंतु लघु, सीमान्त एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता। राज्य के सभी जिलों में लागू।
मिलने वाले लाभ (1) कृषक प्रशिक्षण- अधिकतम 7 दिन (यात्रा अवधि सहित)
अ. राज्य के बाहर - प्रति कृषक प्रतिदिन रू. 1250/- की दर से औसत 50 कृषक दिवस प्रति विकासखण्ड।
ब. राज्य के अंदर - प्रति कृषक प्रतिदिन रू. 1000/- की दर से औसत 100 कृषक दिवस प्रति विकासखण्ड।
स. जिले के अंदर - प्रति कृषक प्रतिदिन रू. 400/- अथवा रू. 250/- की दर से औसत 1000 कृषक दिवस प्रति विकासखण्ड।
(2) प्रदर्शन आयोजन:-
अ. कृषि विभाग- प्रति प्रदर्शन 0.4 हे. क्षेत्र हेतु रू. 3000/- धान, गेहूं, दलहन, तिलहन एवं मक्का हेतु रू. 2000/- की दर से औसत 125 प्रदर्शन प्रति विकासखण्ड।
ब. उद्यानिकी, पशुधन विकास, मत्स्यपालन, रेशमपालन - प्रति प्रदर्शन रू. 4000/- की दर से औसत 50 प्रदर्शन प्रति विकासखण्ड।
(3) कृषक शैक्षणिक भ्रमण - अधिकतम 7 दिन (यात्रा अवधि को छोड़कर)
अ. राज्य के बाहर -प्रति कृषक प्रतिदिन रू. 1000/- की दर से औसत 90 मानव दिवस प्रति वि.ख.।
ब. राज्य के अंदर- प्रति कृषक प्रतिदिन रू. 500/- की दर से औसत 160 मानव दिवस प्रति वि.ख.।
स. जिले के अंदर- प्रति कृषक प्रतिदिन रू. 300/- की दर से औसत 100 मानव दिवस प्रति वि.ख.।
(4) कृषक समूहों को गतिशील करने हेतु:-
अ. क्षमता विकास एवं कौशल उन्नयन -प्रति समूह प्रति वर्ष रू. 5000/- की दर से 20 समूह प्रति वि.ख.।
ब. सीड मनी/रिवाल्विंग फण्ड - प्रति समूह रू. 10000/- की दर से 10 कृषक समूह प्रति विकासखण्ड।
टीप:- उपरोक्त गतिविधियों में महिला कृषकों की न्यूनतम 30 प्रतिशत सहभागिता आवश्यक है।
स. खाद्य सुरक्षा समूह - प्रति महिला समूह रू. 10000/- की दर से 2 महिला समूह प्रति विकासखण्ड।
(5) विकासखण्ड स्तरीय कृषक पुरस्कार:- प्रत्येक विकासखण्ड में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कृषकों को प्रति कृषक रू. 10000/- की दर से प्रतिवर्ष 5 कृषकों को पुरस्कृत किये जाने का प्रावधान है।
(6) जिला स्तरीय कृषक पुरस्कार:- प्रत्येक जिले में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कृषकों को प्रति कृषक रू. 25000/- की दर से प्रतिवर्ष 10 कृषकों को पुरस्कृत किये जाने का प्रावधान है।
(7) राज्य स्तरीय कृषक पुरस्कार:- राज्य में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कृषकों को प्रति कृषक रू. 50,000/- की दर से प्रतिवर्ष 10 कृषकों को पुरस्कृत किये जाने का प्रावधान है।
(8) कृषक समूह पुरस्कार:- जिला में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्यपालन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कृषक समूहों को प्रति कृषक समूह रू. 20,000/- की दर से प्रतिवर्ष 5 कृषक समूहों को पुरस्कृत किये जाने का प्रावधान है।

 
सम्पर्क जिला स्तर-संविदा पर नियुक्त डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर (आत्मा) विकासखण्ड स्तर-बी.टी.एम., ए.टी.एम. ग्राम स्तर-फार्मर फ्रेंड।

ii सब मिशन आन सीड एण्ड प्लांटिंग मटेरियल (SMSP)
के अंतर्गत बीज ग्राम योजना

योजना का उद्देश्य कृषकों को उच्च गुणवत्तायुक्त आधार/प्रमाणित बीज वितरण करना और कृषक को अनाज कोठी हेतु सहायता देना।
हितग्राही की पात्रता समस्त कृषक लाभान्वित किये जाते है परन्तु लघु, सीमान्त, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला कृषको को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाले लाभ बीज वितरण - अनाज फसलो के लिए प्रति कृषक एक एकड़़ के लिये 50 प्रतिशत अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज तथा दलहन, तिलहन, चारा एवं हरी खाद फसल हेतु 60 प्रतिशत अनुदान पर आधार/प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जाता है। कृषक प्रशिक्षण - इसके अंतर्गत प्रति प्रशिक्षण एक समूह में 50 से 150 कृषको को बीज उत्पादन एवं पोस्ट हार्वेस्ट सीड टेक्नालाॅजी के संबंध में प्रशिक्षण दिया जावेगा। जिसके लिये 15000 रू, अनुदान उपलब्ध कराया जायेगा। अनाज कोठी- योजना अंतर्गत 10 क्वि. क्षमता वाले अनाज कोठी हेतु अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को हेतु 33 प्रतिशत् अधिकतम 1500 रू. तथा सामान्य वर्ग के कृषकों को 25 प्रतिशत् अनुदान अधिकतम 1000 रू. अनुदान देय है। इसी प्रकार 20 क्वि. क्षमता वाले अनाज कोठी हेतु अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को 33 प्रतिशत् अधिकतम 3000 रू. तथा सामान्य वर्ग के कृषकों को 25 प्रतिशत् अधिकतम 2000 रू. अनुदान देय है।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

iii. सब मिशन आन एग्रीकल्चर मैकेनाईजेशन (SMAS)
योजनान्तर्गत कृषि यंत्रो का वितरण

योजना का उद्देश्य फार्म पावर उपलब्धता में वृद्धि तथा कृषि कार्य में लगने वाली लागत को कम करने एवं फसल उत्पादन, उत्पादकता में वृद्धि करना।
हितग्राही की पात्रता सभी वर्ग के कृषक।
मिलने वाले लाभ 8 से 70 पी.टी.ओ. हार्स पावर तक के ट्रैक्टर, 8 बी.एच.पी. एवं अधिक के पावर टिलर, स्वचलित, शक्ति चलित एवं हस्त/बैल चलित यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

2. नेशनल मिशन फाॅर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (NMSA) अंतर्गत
i. रेनफेड एरिया डेवलपमेंट योजना (RAD)

योजना का उद्देश्य वर्षा आधारित क्षेत्रों में कृषकों को समन्वित कृषि प्रणाली के माध्यम से जोखिम कम कर आजीविका साधन उपलब्ध कराना।
हितग्राही की पात्रता

क्लस्टर आधार पर सभी वर्ग के कृषक लाभांवित किये जाते है। क्लस्टर का क्षेत्र कम से कम 100 हे.। प्रत्येक कृषक परिवार को अधिकतम 2 हे. तक के लिये अधिकतम 1.00 लाख की सहायता (तालाबों का निर्माण, मरम्मत, भण्डार, पाॅलीहाउस की लागत को छोड़कर)।

एकीकृत फसल पद्धति आवश्यक।

मिलने वाले लाभ:-

1. एकीकृत फसल पद्धति:-

क्र. फसल पद्धति अनुदान
1 कृषि आधारित फसल पद्धति ;आर्थिक महत्व के विरल पौधे जैसे- मूनगा, नींबू, अमरूद, सीताफल, पपीता, आंवला इत्यादि पौधों का रोपणद्ध आदान की लागत का 50ः अधिकतम रू. 10000 प्रति हे. (2 हे.तक)
2 उद्यानिकी आधारित फसल पद्धति आदान की लागत का 50ः अधिकतम रू. 25000 प्रति हे. (2 हे.तक)
3 वृक्ष/चारा आधारित फसल पद्धति आदान की लागत का 50ः अधिकतम रू. 15000 प्रति हे. (2 हे.तक)
4 पशुधन आधारित फसल पद्धति आदान की लागत का 50ः अधिकतम रू. 25000 से रू. 40000 प्रति हे. (2हे.तक)
5 मत्स्य आधारित फसल पद्धति आदान की लागत का 50ः अधिकतम रू. 25000 प्रति हे. (2 हे.तक)

टीपः- कृषि आधारित फसल पद्वति के साथ किसी अन्य एक पद्धति को अपनाना आवश्यक।

2. उप घटक मूल्य संवर्धन एवं प्रक्षेत्र विकास क्रियाकलाप:-

क्र. फसल पद्धति अनुदान
6 मधुमक्खी पालन रू. 800/- प्रति 8 फे्रम की काॅलोनी या प्रति छत्ता अधिकतम 50 काॅलोनी /छत्ता प्रति कृषक अनुदान।
7 सायलेज निर्माण शत्प्रतिशत् अधिकतम रू. 1.25 लाख (सायलोपिट, चैफकटर, तौल कांटा) प्रति कृषक परिवार।
8 ग्रीन हाउस  
i नेचुरली वेन्टीलेटेड टयूबलर स्ट्रक्चर (शेडनेट) रू. 710/- प्रति वर्ग मी. (अधिकतम 500 वर्ग मी. तक) अधिकतम 4000 वर्ग मी. प्रति हितग्राही
ii नेचुरली वेन्टीलेटेड वुडन स्ट्रक्चर (शेडनेट) रू. 492/- प्रति वर्ग मी.। व्यय का 50 प्रतिशत अधिकतम 20 इकाई तक (प्रत्येक इकाई 200 वर्गमी. से अधिक नही होनी चाहिए) प्रति हितग्राही
iii नेचुरली वेन्टीलेटेड बेम्बू स्ट्रक्चर (शेडनेट) रू. 360/- प्रति वर्ग मी.। व्यय का 50 प्रतिशत अधिकतम 20 इकाई तक (प्रत्येक इकाई 200 वर्ग मी. से अधिक नही होनी चाहिए) प्रति हितग्राही
9 जल संग्रहण एवं प्रबंधन  
(a) अनुपयोगी नलकूपों का पुर्नभरण निर्माण लागत का 50ः अधिकतम रू. 5000
(b) सिंचाई पाईप लागत का 50ः या रू. 10000 प्रति हे. अधिकतम (4 हे.)
(c) सिंचाई पंप 50ः अधिकतम रू. 15000 विद्युत/डीजल एवं
रू. 50000 सौर/पवन ऊर्जा इकाई
10 25 हे. तक सिंचाई के लिये सामुदायिक विद्युतीकरण लागत का 50ः अधिकतम रू. 1.25 लाख प्रति इकाई
11 संसाधनों का संरक्षण  
(a) नमी संरक्षण 50ः अधिकतम रू. 4000 प्रति हे. (2 हे.तक)
(b) कन्टूर/ग्रेडेड/स्ट्रेगर्ड बंड़िग/ट्रेन्चिग निजी भूमि में 50ः अधिकतम रू. 5000 प्रति हे. तथा सामुदायिक भूमि में 90ः अधिकतम रू. 1.00 लाख प्रति गांव
(c) बेंच/जिंग टेरेसिंग 50ः अधिकतम रू. 20000 प्रति हे. (2 हे. तक)
12 संसाधनों का संरक्षण  
(a) गली कंट्रोल संरचना (अपर रिच) 50ः अधिकतम रू. 3000 प्रति संरचना निजी भूमि में एवं सामुदायिक भूमि में शत्प्रतिशत् अधिकतम रू. 1.20 लाख प्रति गांव।
(b) गली कंट्रोल संरचना (मिडिल रिच) 50ः अधिकतम रू. 12000 प्रति संरचना निजी भूमि में एवं सामुदायिक भूमि में शत्प्रतिशत् अधिकतम रू. 1.20 लाख प्रति गांव।
(c) गली कंट्रोल संरचना (लोवर रिच) 50ः अधिकतम रू. 20000 प्रति संरचना निजी भूमि में एवं सामुदायिक भूमि में शत्प्रतिशत् अधिकतम रू. 2.40 लाख प्रति गांव।
(d) स्पिल वेज (ड्राप, चूट, स्पूर/रिटेनिंग वाल) 50ः अधिकतम रू. 40000 प्रति संरचना निजी भूमि में एवं सामुदायिक भूमि में शत्प्रतिशत् अधिकतम रू. 1.60 लाख प्रति गांव।
13 वर्मी कम्पोस्ट इकाई/ जैविक आदान उत्पादन इकाई/हरी खाद 50ः अधिकतम रू. 50000 प्रति इकाई पक्की संरचना (अधिकतम रू. 125 प्रति घन फीट) एवं रू. 8000 प्रति HDPE इकाई हरी खाद के लिये 50ः अधिकतम रू. 2000 प्रति हे. (2 हे.तक)।
14 कटाई उपरंत भण्डारण एवं मूल्य आवर्धन हेतु गोदाम निर्माण 50ः अधिकतम रू. 1.50 लाख (राज्य मिशन संचालन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन रायपुर द्वारा जारी मार्गदर्शी निर्देश 2014-15 में उल्लेखित मापदण्ड अनुसार)।
15 कृषि उत्पादकों का संगठन एवं उनका प्रशिक्षण परियोजना लागत का 2ः
16 समस्याग्रस्त मृदा का सुधार  
(a) क्षारीय/सेलाईन 50ः अधिकतम रू. 25000 प्रति हे. या रू. 50000 प्रति हितग्राही।
(b) अम्लीय 50ः अधिकतम रू. 3000 प्रति हे. या रू. 6000 प्रति हितग्राही।
17 प्रशिक्षण रू. 10000 प्रति प्रशिक्षण 20 या अधिक प्रशिक्षणार्थी।
18 प्रदर्शन/प्रशिक्षण 50 या अधिक के समूह के लिये रू. 20000 प्रति प्रदर्शन
  सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

ii स्वायल हैल्थ कार्ड योजना (SHC)
योजना

योजना का उद्देश्य
  • राज्य के समस्त कृषकों को ‘‘स्वायल हेल्थ कार्ड‘‘ उपलब्ध कराकर संतुलित एवं समन्वित उर्वरक उपयोग हेतु प्रोत्साहित करना।
  • मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला का सुदृढ़ीकरण एवं नवीन प्रयोगशालाओं की स्थापना।
  • विकासखण्ड स्तर पर मृदा उर्वरता मानचित्र एवं उर्वरक अनुशंसा तैयार करना।
  • 4.पोषक तत्व प्रबंधन में मैदानी अमले/प्रगतिशील कृषकों का क्षमता विकास।
हितग्राही की पात्रता चयनित पायलेट ग्राम के सभी श्रेणी के कृषकों को योजना में लाभान्वित किये जाना है। ग्राम चयन में गोठान ग्राम को प्राथमिकता।
मिलने वाले लाभ

1. प्रत्येक विकासखण्ड से पांच पायलेट ग्रामों के प्रत्येक कृषकों के हर प्रक्षेत्र से मिट्टी नमूना लेकर विश्लेषण उपरांत किसानों को निःशुल्क स्वायल हेल्थ कार्ड देने का प्रावधान है।

2. स्वायल हेल्थ कार्ड के अनुशंसा के आधार पर सूक्ष्म तत्वों, जैव उर्वरकों एवं मृदा सुधारकों के उपयोग को प्रोत्साहन हेतु प्रदर्शन आयोजन के लिए रू. 2500 प्रति हेक्टेयर अनुदान।

3. प्रत्येक पायलेट ग्राम में संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन हेतु विभिन्न फसल अवस्था में चरणबद्ध मेला/कैम्पेन का आयोजन

सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

iii. परंपरागत कृषि विकास योजना(PKVY)

योजना का उद्देश्य
  • प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित कर बाहरी इनपुट पर किसानों की निर्भरता को कम करने के लिए मिट्टी की उर्वरता के रख-रखाव और संवर्द्धन करना।
  • एकीकृत टिकाऊ जैविक खेती प्रणालियों से लागत में कमी कर प्रति इकाई भूमि पर ॉाुद्ध आय में वृद्धि करना।
  • सतत् रसायन मुक्त और पौष्टिक खाद्य पदार्थ उत्पन्न करना।
  • पारिस्थतिक रूप से कम लागत वाली पारम्परिक तकनीकों को किसान अनुकूल प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित करते हुये खतरनाक अकार्बनिक रसायनों से वातावरण को बचाना।
  • उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य वर्द्धन और प्रमाणीकरण प्रबंधन हेतु किसानों को अपने स्वयं के संस्थागत विकास-कलस्टर एवं समूह के माध्यम से सशक्त बनाना।
  • स्थानीय और राष्ट्रीय बाजारों के साथ संबद्ध करके किसानों को उद्यमी बनाना।
हितग्राही की पात्रता चयनित क्लस्टर में सम्मिलित सभी वर्ग एवं श्रेणी के कृषक।
मिलने वाले लाभ क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

परंपरागत कृषि विकाश योजनान्तर्गत प्रति हेक्टेअर घटकवार, वर्षवार प्रावधानित अनुदान सहायता का वितरण :-

क्र. घटक प्रथम वर्ष   द्वितीय वर्ष तृतीया वर्ष प्रति हेक्टेयर क्षेत्रफल हेतु 3 वर्षो के लिए कुल राशि रु.
  सहायक संस्थानों के माध्यम से योजना क्रियान्वयन        
           
           
           

3. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY)

i. (Per Drop More Crop)

योजना का उद्देश्य सिंचाई दक्षता में वृद्धि।
हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के कृषक अधिकतम 5 हे. तक लाभांवित किये जाते है।
मिलने वाले लाभ ड्रिप/स्प्रिंकलर  सिस्टम हेतु लघु एवं सीमांत कृषकों को इकाई लागत या वास्तविक लागत जो भी कम हो का 70 प्रतिशत अन्य कृषकों को इकाई लागत या वास्तविक लागत जो भी कम हो का 50 प्रतिशत अनुदान देय है।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

ii. एकीकृत जलग्रहण प्रबंधन (IWMP)

योजना का उद्देश्य जलग्रहण अपवाह क्षेत्र में मृदा एवं जल सरंक्षण का प्रभावी प्रबंधन।
हितग्राही की पात्रता जलग्रहण क्षेत्र के सभी कृषक, लघु सीमांत कृषक एवं परिसम्पति रहित व्यक्तियों को प्राथमिकता।
मिलने वाले लाभ उत्पादन प्रणाली एवं सूक्ष्म उद्यमियों के लिये क्षमता निर्माण, आस्था मूलक क्रियाकलाप, रिज एरिया उपचार, जल निकास लाईन उपचार, मृदा एवं नमी संरक्षण, वन रोपण, बागवानी, चारागाह विकास, आजीविका क्रियाकलाप, प्रभावी वर्षा जल प्रबंधन।
संपर्क जलग्रहण क्षेत्र के परियोजना अधिकारी, जलागम समिति के अध्यक्ष एवं WDT सदस्य।

4. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना(RKVY)

i. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (सामान्य)

योजना का उद्देश्य कृषि एवं समवर्गी क्षेत्र में प्रतिस्थापन दर में वृद्धि करना सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देना, स्थानीय जरूरतों/फसलों के अनुकूल योजनाएं तैयार करना, कृषि समवर्गी क्षेत्र में किसानों की आय अधिकतम करना, उपज अंतर को कम करना, उत्पादन/उत्पादकता बढ़ाना।
हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किये जाते हैं परंतु लघु, सीमांत, अनु.जाति/अनु.जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाला लाभ
  • शैलोट्यूबवेल प्रतिस्थापना - खनन में रू. 5000 एवं पम्प प्रतिस्थापन हेतु रू. 15000 अधिकतम।
  • दलहनी फसलों के बीज मिनिकिट का निःशुल्क वितरण।
  • हाईब्रिड मक्का बीज मिनिकिट का निःशुल्क वितरण।
  • चेकडेम निर्माण: शासकीय भूमि पर शत-प्रतिशत अनुदान।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

ii. हरित क्रांति विस्तार योजना (BGREI)

योजना का उद्देश्य मुख्य रूप से धान एवं गेहूॅ फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि के लिए आवश्यक घटकों का समावेश करना। वर्षा जल के संग्रहण हेतु लघु सिंचाई तालाब एवं चेकडेम निर्माण द्वारा प्रदेश की प्रमुख फसलों हेतु सुरक्षात्मक सिंचाई तथा भू-जल संवर्धन। उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देना।
कार्यक्षेत्र गरियाबंद, महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, जांजगीर-चांपा, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कांकेर, नारायणपुर, जगदलपुर एवं कोण्डागांव (14 जिले)
हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किये जाते हैं परंतु लघु, सीमांत, अनु.जाति/अनु.जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाला लाभ
  • चयनित जिलों मेें धान वृहद खण्ड प्रदर्शन का आयोजन।
  • बीज उत्पादन कार्यक्रम।
  • बीज वितरण कार्यक्रम।
  • नलकूप खनन पर अनुदान।
  • उन्नत कृषि यंत्रों पर अनुदान।
  • चेकडेम निर्माण: शासकीय भूमि पर शत-प्रतिशत अनुदान।
  • लघु सिंचाई तालाब निर्माण: शासकीय भूमि पर शत-प्रतिशत अनुदान।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

हरित क्रांति विस्तार योजनान्तर्गत:-

क्र. घटक अनुदान सहायता
1 धान वृहद खण्ड प्रदर्शन भारत सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुरूप प्रति हे. अनुदान देय
  गेहूॅ खण्ड प्रदर्शन भारत सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुरूप प्रति हे. अनुदान देय
2 धान बीज उत्पादन (10 वर्ष के अंदर की किस्म)  
  अ. संकर धान रू. 10000 प्रति क्विंटल
  ब. प्रमाणित बीज रू. 2000 प्रति क्विंटल
3 धान बीज वितरण (10 वर्ष के अंदर की किस्म)  
  अ. संकर धान रू. 10000 प्रति क्विंटल
  ब. प्रमाणित बीज रू. 2000 प्रति क्विंटल
4 सूक्ष्म तत्व वितरण  
  अ. सूक्ष्म तत्व रू. 500 प्रति हेक्टेयर
  ब. चूना रू. 1000 प्रति हेक्टेयर
  स. जैव उर्वरक रू. 300 प्रति हेक्टेयर
  द. जिप्सम रू. 750 प्रति हेक्टेयर
5 एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन  
  अ. पौध संरक्षण दवा/जैव कीटनाशक रू. 500 प्रति हेक्टेयर
  ब. निंदानाशक रू. 500 प्रति हेक्टेयर
  नलकूप खनन रू. 30000 प्रति नलकूप
a कृषि यंत्र वितरण  
  ड्रम सीडर, जीरो टिल सीड ड्रिल, सीड ड्रिल, रोटावेटर, सेल्फ प्रोपेल्ड पेडी ट्रांस्प्लांटर, पम्प सेट, कोनो-विडर, कोनो-विडर, मेनुअल स्प्रेयर, पाॅवर नेपसेक स्प्रेयर, पाॅवर विडर, पेडी थ्रेशर, मल्टीक्राप थ्रेशर, लेज़र लेण्ड लेवलर, अन्य कृषि यंत्र, पाॅवर टिलर (8 बी.एच.पी.) सेल्फ प्रोपेल्ड रिपर एम.बी. प्लाउ (35 बी.एच.पी.), लेवलर ब्लेड (टेªक्टर 35 बी.एच.पीसे अधिक) लेवलर ब्लेड ( टेªक्टर 35 बी.एच.पी से अधिक), हेरो (टेªक्टर 35 बी.एच.पी. से अधिक) उड़ावनी पंखा (हस्त चलित), पाॅवर विडर (शक्ति चलित 2 बी.एच.पी.) धान खण्ड प्रदर्शन (क्रापिंग बेस्ड) प्रशिक्षण भारत सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुरूप प्रति
यंत्र अनुदान देय।

5. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM)

i. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन - चांवल
रायपुर, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर, मुंगेली, कोरबा, रायगढ़, कोरिया, जशपुर, दंतेवाडा, सुकमा, बीजापुर जिलो  मे क्रियान्वित।

योजना का
उद्देश्य
चयनित 13 जिलो में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत धान के क्षेत्र में उत्पादन एवं उत्पादकता में
वृद्धि करना।
हितग्राही
की पात्रता
समस्त कृषक लाभान्वित किये जाते है परन्तु लघु, सीमान्त अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला कृषकों
को प्राथमिकता दी जाती है। चिन्हाकित 13 जिलों के सभी कृषक।
मिलने
वाले लाभ
क्र. घटक अनुदान
1 क्लस्टर प्रदर्शन  
  धान फसल की सीधी बुवाई/कतार
रोपा/श्रीविधि प्रदर्शन
रू. 9000 प्रति हे.
  संकर धान प्रदर्शन  रू. 9000 प्रति हे.
  स्वर्णा सब-1 धान प्रदर्शन रू. 9000 प्रति हे.
  फसल प्रद्धति आधारित प्रदर्शन रू. 15000 प्रति हे.
2 बीज वितरण (अनुदान रू. प्रति इकाई अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो)  
  संकर धान रू. 10000 प्रति क्विं.
  उन्नत किस्म बीज रू. 2000 प्रति क्विं. (10 वर्ष से कम के किस्म)
रू. 1000 प्रति क्विं. (10 वर्ष से अधिक के किस्म)
3 पौध एवं मृदा संरक्षण प्रबंधन (अनुदान रू. प्रति इकाई अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो)  
  (अ) सूक्ष्म पोषक तत्व रू. 500 प्रति हे.
  (ब) अम्लीय मृदा हेतु चूना रू. 1000 प्रति हे.
  (स) पौध संरक्षण रसायन एवं बायोएजेटं रू. 500 प्रति हे.
  (द) नींदानाशक रू. 500 प्रति हे.
4 संसाधन संरक्षण तकनीक/उपकरण (अनुदान रू. प्रति इकाई)  
  (1) कोनोविडर

रू. 600/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो। (अ.जा./अ.ज.जा लघ् एवं सीमांत, महिला कृषक)

रू. 500/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो (अन्य कृषक)

  (2) हस्तचलित स्प्रेयर

रू. 600/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो। (अ.जा./अ.ज.जा लघ्ाु एवं सीमांत, महिला कृषक)

रू. 500/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)

  (3) शक्ति चलित नेपसेक स्प्रेयर

रू. 3100/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।

(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)

रू. 2500/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)

  (4) सीडड्रिल (20 बीएचपी से कम) रू. 15000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 12000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (5) पावर वीडर रू. 15000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 12000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (6) जीरो  टिल मल्टी क्रापॅ प्लांटर रू. 19000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 15000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (7) ड्रम सीडर रू. 1900/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 1500/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (8) रोटावेटर (20 बीएचपी से कम) रू. 35000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो। (अ.जा./अ.जजा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 28000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (9) पैडी थ्रेसर/मल्टी क्राॅप थेस्रर (35 बीएचपी से अधिक) रू. 63000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 50000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (10) सेल्फ प्रोपेल्ड पैडी ट्रान्सप्लांटर (4 रो) रू. 94000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 75000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (11) पावर टिलर (8 बीएचपी से अधिक) रू. 75000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 60000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (12) रीपर (35 बीएचपी से अधिक) रू. 63000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 50000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
5 पम्प सेट वितरण रू. 10000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो
6 पाईप (एचडीपीई) कीमत का 50 प्रतिशत 50 रू. प्रति मीटर एचडीपीई पाईप, 35 रू. प्रति मीटर पीवीसी पाईप, 20 रू. प्रति मीटर एचडीपीई लेमिनेटेट वोवन ले फ्लैट ट्यूब्स अधिकतम कीमत रू. 15000 प्रति कृषक
7 फसल पद्धति आधारित प्रशिक्षण रू. 3500ध्. प्रति सीजन कुल रू. 14000/-
8 स्थानीय पहल - गोदाम निर्माण अधिकतम रू. 1.50 लाख या कीमत का 50ः जो भी कम हो।

 

सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

ii. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन - दलहन

योजना का
उद्देश्य
प्रदेश मं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत दलहन के क्षत्रे विस्तार एव उत्पादन- उत्पादकता मे  वृद्धि करना। राज्य के सभी जिलो  में क्रियान्वित है।
हितग्राही की
पात्रता
समस्त कृषक लाभान्वित किये जाते है, परन्तु लघु, सीमान्त, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाले
लाभ
क्र घटक सहायता हेतु अनुमोदित दर
1 उन्नत तकनीकी फसल प्रदर्शन रू. 9000 प्रति हे
  अंतर्वर्तीयफसल प्रदर्शन रू. 9000 प्रति हे.
  फसल पद्धति आधारित प्रदर्शन रू. 15000 प्रति हे.
2 बीज वितरण एवं उत्पादन (अनुदान रू. प्रति इकाई अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो)  
  (अ) उन्नत किस्म बीज वितरण रू. 5000 प्रति क्विं. (10 वर्ष से कम के किस्म)
रू. 2500 प्रति क्विं. (10 वर्ष से अधिक के किस्म)
  (ब) बीज उत्पादन रू. 5000 प्रति हे. (10 वर्ष से कम के किस्म)
3 पौध एवं मृदा संरक्षण प्रबंधन  
  (अ) सूक्ष्म पोषक तत्व रू. 500 प्रति हे
  (ब) जिप्सम/ 80% सल्फर रू. 750 प्रति हे.
  (स) अम्लीय मृदा हेतु चूना रू. 1000 प्रति हे.
  (द) जैव उर्वरक रू. 300 प्रति हे.
  (इ) पौध संरक्षण रसायन रू. 500 प्रति हे.
  (फ) नींदानाशक रू. 500 प्रति हे.
4 संसाधन संरक्षण तकनीक/उपकरण (अनुदान रू. प्रति इकाई)  
  (1) हस्तचलित स्प्रेयर रू. 600/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो। (अ.जा./अ.जजा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 500/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  2) शक्ति चलित नेपसेक स्प्रेयर रू. 3100/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 2500/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (3) सीडड्रिल रू. 15000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो। (अ.जा./अज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 12000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (4) पावर टिलर (8 BHP या अधिक) रू. 75000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 60000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो। (अन्य कृषक)
  (5) जीरो टिल मल्टी क्राॅप प्लांटर
(20-35 BHP अधिक)
रू. 19000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 15000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो।
(अन्य कृषक)
  (6) रोटावेटर रू. 35000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 28000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो।
(अन्य कृषक)
  (7) मल्टी क्राॅप थे्रसर (35 BHP से अधिक) रू. 63000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 50000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो।
(अन्य कृषक)
  (8) रीपर रू. 63000/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 50000/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम हो।
(अन्य कृषक)
5 दक्षता तकनीक (अनुदान रू. प्रति इकाई अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो)  
  (1) पम्प सेट वितरण रू. 10000/-
  (2) स्पिं्रकलर सेट रू. 10000/-
  (3) मोबाईल रेनगन रू. 15000/-
  (4) पाईप (एचडीपीई पाईप) कीमत का 50 प्रतिशत 50 रू. प्रति मीटर एचडीपीई पाईप, 35 रू.प्रति मीटर पीवीसी पाईप, 20 रू. प्रति मीटर एचडीपीई लेमिनेटेट
वोवन ले फ्लैट ट्यूब्स अधिकतम कीमत रू. 15000 प्रति कृषक
6 फसल पद्धति आधारित प्रशिक्षण रू. 3500ध्. प्रति सीजन कुल रू. 14000/-
7 स्थानीय पहल -  
  (1) गोदाम निर्माण अधिकतम रू. 1.50 लाख
  (2) दाल मिल रू. 1.50 लाख अथवा 60 प्रतिशत जो भी कम हो।
(अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
रू. 1.25 लाख अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो। (अन्य कृषक)

 

सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

 

iii. राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन - मोटे अनाज
(गरियाबंद, कोरिया, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, जगदलपुर, कोण्डागांव, कांकेर)

योजना का
उद्देश्य
प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन के अन्तगर्त 8 जिलो मं मोटे अनाज मक्का का उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि करना।
हितग्राही की
पात्रता
समस्त कृषक लाभान्वित किये जाते है, परन्तु लघु, सीमान्त, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाले
लाभ
क्र. घटक अनुदान
1 उन्नत तकनीकी फसल प्रदर्शन (मक्का, ज्वार, बाजरा, कोदो कुटकी एवं अन्य) रू. 6000 प्रति हे.
2 अंर्तवर्तीय फसल प्रदर्शन रू. 6000 प्रति हे.
3 बीज वितरण  
  (अ) उन्नत किस्म बीज (10 वर्ष से कम के किस्म) रू. 3000 प्रति क्विं.
  (ब) उन्नत किस्म बीज (10 वर्ष से अधिक के किस्म) रू. 1500 प्रति क्विं.
  (स) संकर बीज रू. 10000 प्रति क्वि

 

सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

iv.राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन - न्यूट्री सिरियल्स
(बलरामपुर, जगदलपुर, दंतेवाडा, कबीरधाम, कांकेर, कोण्डागांव, कोरिया, राजनांदगांव, सरगंजा, सुकमा)

योजना का
उद्देश्य
प्रदेश मं राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा मिशन के अन्तगर्त 10 जिलो  मंकोदा, कुटकी एंव रागी का क्षेत्र विस्तार एव  उत्पादन-उत्पादकता मे  वृद्धि करना।
हितग्राही की
पात्रता
समस्त कृषक लाभान्वित किये जाते है, परन्तु लघु, सीमान्त, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाले
लाभ
क्र. घटक अनुदान
1 अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (मक्का, कोदो, कुटकी) रू. 6000 प्रति हे.
2 बीज वितरण  
  (अ) उन्नत किस्म बीज - ज्वार, कोदो कुटकी(10 वर्ष से कम के किस्म) रू. 3000 प्रति क्विं.
  (10 वर्ष से अधिक के किस्म) रू. 1500 प्रति. क्विं.
  बीज उत्पादन  
3 (अ) उन्नत किस्म बीज - रागी, कोदो (10 वर्ष से कम के
किस्म)
रू. 3000 प्रति क्विं.
  (अ) सूक्ष्म पोषक तत्व रू. 500 प्रति हे.
  (ब) जैव उर्वरक रू. 300 प्रति हे.
  (स) पौध संरक्षण रसायन रू. 500 प्रति हे.
  (द) नींदानाशक रू. 500 प्रति हे
  संसाधन संरक्षण तकनीक/उपकरण (अनुदान रू. प्रति इकाई)  
  (1) हस्तचलित स्प्रेयर रू. 600/- अथवा कीमत का 50ः जो भी कम
हो। (अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला
कृषक)
रू. 500/- अथवा कीमत का 40ः जो भी कम
हो। (अन्य कृषक)
  सिंचाई दक्षता तकनीक (अनुदान रू. प्रति इकाई अथवा कीमत का 50ः जो भी कम हो)  
  (1) स्पिं्रकलर सेट रू. 10000/-
7 फसल पद्धति आधारित प्रशिक्षण प्रति सीजन कुल रू. 14000/-
8 स्थानीय पहल -  
  मिलेट मिल रू. 1.50 लाख अथवा 60 प्रतिशत जो भी कम हो। (अ.जा./अ.ज.जा. लघु एवं सीमांत, महिला कृषक)
    रू. 1.25 लाख अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
(अन्य कृषक)

 

सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

v.टारगेटिंग राईस फेलो एरिया (टी.आर.एफ.ए.)

उद्देश्य योजना का मख् य उद्देश्य पूर्वी भारत के राज्यो  के अंतर्गत धान आधारित द्विफसलीय भूमि में दलहन एवं तिलहन क्षेत्र विस्तार है।
 
क्रियान्वित जिले गरियाबंद, रायगढ़, राजनांदगांव, कांकेर, कोण्डागांव, सरगुजा, बिलासपुर, बलौदाबाजार एवं जगदलपुर।
दलहन एवं तिलहन फसल क्लस्टर प्रदर्शन दलहन एवं तिलहन फसलो  का प्रदर्शन भारत सरकार, कृषि मंत्रालय  के निर्धारित नाम्र्स अनुरूप।
दलहन बीज वितरण दलहन प्रमाणित बीज वितरण पर रू. 5000 प्रति क्विंटल अनुदान।
सूक्ष्म तत्व वितरण निर्धारित सूक्ष्म तत्व पर रू. 500 से रू. 1000 अनुदान देय है।
सिंचाई विस्तार स्प्रिंकलर एवं सिंचाई पाईप पर भारत सरकार, कृषि मंत्रालय के निर्धारित नाम्र्स अनुरूप।
कृषि यंत्र वितरण NFSM/SMAM योजना में प्रावधानित नाम्र्स के अनुरूप कृषि यंत्रों का वितरण।

6. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (ऑइलसीड्स) 

योजना का उद्देश्य तिलहन फसल के क्षत्रे एव उत्पादन मे वृद्धि करना।
हितग्राही की पात्रता  सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किये जाते हैं परंतु लघु, सीमांत, अनु.जाति/ अनु.जनजाति कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाले लाभ
  • ब्रीडर सीड का क्रय - वास्तविक कीमत (शासकीय/बीज निगम/कृषि विश्वविद्यालय के प्रक्षेत्र हेतु)
  • आधार/प्रमाणित बीज उत्पादन पर अनुदान - 10 वर्ष के भीतर की किस्मों के लिये रू. 2500 प्रति क्विंटल
  • प्रमाणित बीज वितरण: 15 वर्ष के भीतर की किस्मों के लिये वास्तविक कीमत का 50 प्रतिशत या अधिकतम राशि रू. 4000/- प्रति क्वि. जो भी कम हो। तिल फसल के लिये यह सीमा राशि.
  • रू. 8000/- अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो देय होगा।
  • मिनिकिट वितरण: भारत सरकार से प्राप्त मिनिकिट पर शत-प्रतिशत अनुदान।
  • कृषक खेत पाठशाला: प्रति पाठशाला रू. 26700 (10 हेक्टेयर क्षेत्र)
  • खण्ड प्रदर्शन:-
खण्ड प्रदर्शन फसल अनुदान
सोयाबीन रू. 6000 अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो
मूॅगफली रू. 10000 प्रति हेक्टेयर अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
रामतिल रू. 3000 प्रति हें. 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
सूरजमुखी रू. 4000 प्रति हें. 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
राई सरसों रू. 3000 प्रति हें. 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
अलसी रू. 3000 प्रति हें. 50 प्रतिशत जो भी कम हो।

कृषक प्रशिक्षण: रू. 24000 प्रति प्रशिक्षण (30 कृषक दो दिवस)
विस्तार अधिकारियो ं का प्रशिक्षण: रू. 36000 प्रति प्रशिक्षण (20 अधिकारी दो दिवस)
मानव चलित पौध संरक्षण यंत्र: रू. 600 या 40 प्रतिशत जो भी कम हो तथा अ.जा. /अ.ज.जा. तथा लघु-सीमांत के लिये रू. 750 अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
पौध संरक्षण औषधि (फफंदू नाशक, नींदानाशक, खरपतवारनाशी, सूक्ष्मतत्व एव जैवकीटनाशी): रू. 500 अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
राईजोबियम, पी.एस.बी., जेड एस.बी., एजेक्टोबेक्टर आदि: रू. 300 या 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
कृषि यंत्र वितरण - (ग्राउंडनट डिगर, विनोईंग फेन, विडर, सीड ड्रिल): मानव/बैल चलित -रू. 8000 या 40 प्रतिशत जो भी कम हो तथा अ.जा./अ.ज.जा. लघु-सीमांत हेतु रू. 10000 अथवा 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
शक्ति चलित पौध संरक्षण यंत्र एवं कृषि यंत्र वितरण NFSM/SMAM नाम्र्स के अनुरूप। 

7. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

1. उद्देश्य:-
प्राकृतिक आपदाआं, कीट और रोगो  के कारण किसी भी अधिसूचित फसल के नष्ट होने की स्थिति में किसानो  को बीमा कवरेज और वित्तीय सहायता प्रदाय करना जिससे किसानो  की आय स्थिर हो और वे आधुनिक कृषि प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हो सकें। कृषि क्षेत्र के लिए ऋण प्रवाह सुनिश्चित करना।
2. अधिसूचित फसले :-
मौसम खरीफ:-
(क) मुख्य फसल:- धान सिंचित एवं धान असिंचित।
(ख) अन्य फसल:- मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, मूंग एवं उड़द।
मौसम रबी:-
(क) मुख्य फसल:- चना
(ख) अन्य फसल:- गेहू सिंचित एवं गेहू असिंचित, अलसी, राई सरसों।
3. प्रीमियम दर:-
(क) मौसम खरीफ की अधिसूचित फसलों हेतु सभी कृषको  के लिए बीमित राशि का अधिकतम 2 प्रतिशत है।
(ख) मौसम रबी की अधिसूचित फसलों हेतु सभी कृषकों के लिए बीमित राशि का अधिकतम 1.5 प्रतिशत है।
4. बीमा इकाई क्षेत्र:- सभी फसलों के लिए बीमा इकाई ‘‘ग्राम’’ है।
5. फसलीय क्षेत्र:-

(क) मौसम खरीफ एवं रबी:- सभी फसलों के लिए बीमा इकाई स्तर पर न्यूनतम 15 हेक्टेयर है।
6. फसल कटाई प्रयोग की फसलवार संख्या:-
(क) समस्त अधिसूचित फसल:- 4 फसल कटाई प्रयोग आयोजित किये जायेगं ।
7. अधिसूचित फसलो  का क्षतिस्तर -
मौसम खरीफ:-

(क) धान सिंचित - 90 प्रतिशत।
(ख) शेष समस्त अधिसूचित फसल - 80 प्रतिशत।
मौसम रबी:-
(क) चना:- 90 प्रतिशत।
(ख) शेष समस्त अधिसूचित फसल - 80 प्रतिशत।

8. बीमा पात्रता:-
(क) ऋणी किसान (अनिवार्य रूप से):- फसल बीमा हेतु अधिसूचित क्षेत्र के ऐसे किसान जिनके पास फसल ऋण खाता/किसान क्रेडिट कार्ड है और अधिसूचित फसल के लिए मौसम के दौरान फसल ऋण सीमा स्वीकृत/नवीनीकरण की गई है।

(ख) अऋणी किसान (ऐच्छिक रूप से):- फसल बीमा हेतु अधिसूचित क्षेत्र के ऐसे किसान जिन्होने बैंक/वित्तीय संस्थाओं से फसल ऋण नहीं लिया हो अऋणी किसान की श्रेणी मं होंगे। अऋणी किसान स्वयं बैंक/वित्तीय संस्था, क्रियान्वयक बीमा कंपनी एवं CSC जाकर बोई गई फसलों का बीमा करवायेंगे।
9. भारत सरकार द्वारा अधिकृत बीमा कंपनी:-
एग्रीकल्चर इन्श्योरेंस कंपनी आफ इंडिया लिमिटेड, आई.सी.आई.सी.आई लुम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एच.डी.एफ.सी. इरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, इफको-टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, चोलामण्डलम एम.एस.जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, बजाज एलिआंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, फ्यूचर जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, टाटा ए.आई.जी. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, एस.बी.आई. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, भारती एक्सा जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, आॅरिएण्टल इंश्योरंेस कंपनी।
10. जोखिमों की आच्छादन एवं अपवर्जन:-
(i)भारत सरकार द्वारा स्वीकृत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिये निर्गत संशोधित मार्गदर्शिका में वर्णित सभी प्रकार के जोखिमों, जो निम्नानुसार है, हेतु बीमा आवरण उपलब्ध होगा -
(क) बाधित बोनी/रोपण/अंकुरण जोखिम: बीमाकृत क्षेत्र में कम वर्षा अथवा प्रतिकुल मौसमी दशाओं के कारण बोआई/रोपण क्रिया न होने वाली हानि से सुरक्षा प्रदान करेगा। (ख) खड़ी फसल (बुवाई से कटाई तक): बाधित जोखिमों हेतु विस्तृत बीमा कव्हरेज यथा सूखा, शुष्क अवधि, बाढ़, जलप्लावन, विस्तृत कीट एवं व्याधि आक्रमण, भू-स्खलन, प्राकृतिक अग्नि दुर्घटनाओं और आकाशीय बिजली, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, आंधी, समुद्री तूफान, भंवर, और बवंडर के कारण फसल को होने वाले नुकसान की सुरक्षा के लिये वृहत जोखिम बीमा दिया जायेगा।

(ग) फसल कटाई के उपरांत होने वाले नुकसान: यह बीमा आच्छादन ऐसी अधिसूचित फसलों के कटाई उपरांत अधिकतम दो सप्ताह (14 दिन) के लिये चक्रवात और चक्रवातीय वर्षा एवं बेमौसमी वर्षा के मामले में दिया जायेगा, जिन्हे फसल कटाई के बाद खेत में सूखने के लिये छोडा गया अथवा छोटे बंडलों में बांध कर रखा गया है।

(घ) स्थानीयकृत आपदाएं: अधिसूचित क्षेत्र में पृथक कृषक भूमि को प्रभावित करने वाली ओलावृष्टि, भू-स्खलन, जल प्लावन, बादल फटना और प्राकृतिक आकाशीय बिजली से व्यक्तिगत आधार पर अभिचिन्हित स्थानीयकृत जोखिमों से होने वाले क्षति से सुरक्षा प्रदान करेगा।
(ii) सामान्य अपवर्जन: युद्ध, नाभिकीय जोखिमों से होने वाली हानियों दुर्भावना-जनित क्षतिओं और अन्य निवारणीय जोखिमों को इसमें शामिल नही किया गया है।
11. प्रीमियम अनुदान:-
किसानों द्वारा देय बीमा प्रभार की दर निर्धारित प्रीमियम दर के अंतर की राशि केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा समान रूप से देय होगी।
12. योजना का प्रबंधन:-
जिला स्तर पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के उचित प्रबंधन के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय निगरानी समिति उत्तरदायी होगी। संपर्क:- अधिक जानकारी एवं समस्या हेतु निकटतम कृषि विभाग, राजस्व विभाग, अधिकृत बीमा एजेंसी, बैंक/वित्तीय संस्था के कार्यालय से सम्पर्क करें।

A-II. राज्य पोषित योजनाऐं

1. कृषक समग्र विकास योजना

इस योजना के चार उप योजना है:

(i)अक्ती बीज संवर्धन योजना। (ii) रामतिल उत्पादन प्रोत्साहन योजना।

(iii)दलहन बीज उत्पादन प्रोत्साहन योजना।(iv)राज्य गन्ना विकास योजना।

(i)अक्ती बीज संवर्धन योजना।

योजना का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता युक्त आधार/प्रमाणित बीज की उचित मूल्य पर उपलब्धता सुनिश्चित करना।
हितग्राही की पात्रता छत्तीसगढ़ राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था में पंजीकृत कृषक एवं ऐसे कृषक जिन्होंने बीज उत्पादन संचालनालय कृषि अथवा छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के माध्यम से लिया हो।
मिलने वाला लाभ 1. बीज उत्पादन पर अनुदान:- प्रदेश के बीज उत्पादक कृषकों/ संस्थाओं को धान, गेहॅू, रागी, कोदों एवं कुटकी फसलों के प्रजनक से आधार, आधार से प्रमाणित एवं प्रमाणित 1 से प्रमाणित 2 बीज उत्पादन पर रू. 500/ क्विंटल अनुदान देय है। इसी प्रकार तिलहनी फसलों के प्रजनक से आधार, आधार से प्रमाणित एवं प्रमाणित 1 से प्रमाणित 2 बीज उत्पादन पर रू. 1000/ क्विंटल अनुदान देय है।
2. बीज वितरण पर अनुदान:- प्रदेश के कृषकों को धान, गेहॅू, रागी, कोदों एवं कुटकी फसलों के आधार एवं प्रमाणित बीज वितरण पर रू. 500/ क्विंटल की दर से क्रेता कृषक को छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम/ संचालक कृषि के माध्यम से अनुदान देय है। इसी प्रकार तिलहनी फसलों के आधार एवं प्रमाणित बीज वितरण पर रू. 1000/ क्विंटल की दर से क्रेता कृषक को छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम/ संचालक कृषि के माध्यम से अनुदान देय है।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

ii.रामतिल बीज उत्पादन प्रोत्साहन योजना

(जगदलपुर, कोण्डागांव, दंतेवाड़ा, सुकमा, कांकेर, जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर एवं सूरजपुर जिलों के लिये लागू)

योजना का उद्देश्य

1. रामतिल की कम उत्पादकता वाली किस्मों को नवीन उन्नत किस्मों से प्रतिस्थापित करना।

2. फसल एकीकृत पोषण प्रबंधन को प्रोत्साहन देते हुये भूमि की उर्वरा शक्ति व फसल उत्पादन में वृद्धि।

3. उच्चहन क्षेत्रों में कम लाभकारी फसलों तथा कोदो-कुटकी व उच्चहन धान को रामतिल से प्रतिस्थापित करना।

4. कृषकों को रामतिल कास्त की अद्यतन तकनीकों से परिचित कराना व अतिरिक्त आय का एक सुनिश्चित विकल्प उपलब्ध कराना।

5. रामतिल बीज उत्पादन कार्यक्रम को बढ़ावा देना।

हितग्राही की पात्रता चयनित जिलों के अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषक।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

मिलने वाला लाभ:- योजना का घटक व अनुदान सहायता का विवरण:

क्र. घटक का नाम अनुदान सहायता का विवरण
1 बीज  
  बीज मिनीकिट वितरण शत-प्रतिशत अनुदान
ब्रीडर सीड खरीदी पर अनुदान अधिकतम रू. 6500.00 या बीज की वास्तविक कीमत
आधार बीज उत्पादन प्रोत्साहन अनुदान रू. 500.00 प्रति क्विंटल (रू. 375.00 कृषक हेतु तथा रू. 175.00 बीज ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग आदि पर व्यय)
प्रमाणित बीज उत्पादन प्रोत्साहन अनुदान रू. 500.00 प्रति क्विंटल (रू. 375.00 कृषक हेतु तथा रू. 175.00 बीज ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग आदि पर व्यय)
प्रमाणित बीज वितरण अनुदान रू. 800.00 प्रति क्विंटल या कीमत का 30 प्रतिशत जो भी कम हो
2 खण्ड प्रदर्शन प्रदर्शन हेतु आवश्यक आदान सामग्री के लिए रू. 500.00 या कीमत का 50 प्रतिशत जो भी कम हो।
3 हस्त/ बैल चलित कृषि यंत्र पर अनुदान हस्त चलित/ बैल चलित कृषि यंत्र पर कीमत का 50 प्रतिशत अनुदान या न्यूनतम जो भी कम हो देय होगा।
अनुदान कीमत का 50 प्रतिशत या निम्नानुसार जो भी कम हो देय (रू.)
3.1 बैल चलित यंत्र  
  मोल्ड बोल्ड आयरन फ्लाऊ 400.00
  नवगांव नारी हल 500.00
  तेन्दुआ आयरन फ्लाऊ 600.00
  इंदिरा मोड बोल्ड फ्लाऊ 400.00
3.2 हस्तचलित यंत्र  
  पेग टाइप ब्रीडर 350.00
  सायकल व्हील हो 350.00
  सीड ट्रीटिंग ड्रम 600.00
  हैण्ड हो 50.00
4 उर्वरक मिनीकिट वितरण
कुल रू. 300.00 प्रति मिनीकिट
 
5 बीजोपचार फफूंद नाशी रसायन हेतु 15 रू. प्रति हे. अनुदान
6 पी.एस.बी. फफूंद नाशी रसायन हेतु 15 रू. प्रति हे. अनुदान
7 सूक्ष्म तत्व (जिंक सल्फेट/ कैल्शियम कार्बोनेट) प्रति हे. रू. 200.00 अनुदान
8 कृषक प्रशिक्षण 30 कृषकों के समूह के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण रू. 3500.00 प्रति प्रशिक्षण देय होगा।
9 आकस्मिक व्यय प्रचार-प्रसार एवं साहित्य सामग्री हेतु व्यय

iii. दलहन बीज उत्पादन प्रोत्साहन योजना

योजना का उद्देश्य

दलहन बीज उत्पादन हेतु प्रोत्साहन।

हितग्राही की पात्रता

समस्त कृषक लाभांवित किये जाते है, परन्तु लघु सीमांत अनुसूचित जाति/ जनजाति एवं महिला कृषको को प्राथमिकता दी जाती हं।

मिलने वाला लाभ

10 वर्ष से अधिक अधिसूचित दलहन बीज किस्मों पर रू. 1000 प्रति क्विंटल उत्पादन अनुदान देय है। बीज उत्पादन पर अनुदान का भुगतान उप संचालक कृषि के द्वारा संबंधित संस्था के माध्यम से कृषक को किया जावेगा जिनके माध्यम से कृषक ने बीज उत्पादन कार्यक्रम लिया है।

सम्पर्क

क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

 IV. राज्य गन्ना विकास योजना

योजना का उद्देश्य गन्ना कृषकों को अनुदान।
हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के कृषक लाभान्वित किये जाते हैं परंतु लघु, सीमांत, अनु.जाति/जनजाति, महिला कृषकों को प्राथमिकता।
मिलने वाला लाभ

कृषकों को निम्नानुसार अनुदान देय है:- बीज क्रय पर अधिकतम रू. 5000/- प्रति हे. का अनुदान। टिश्यु कल्चर पौधों पर अधिकतम रू. 5/- प्रति पौधा अनुदान या 50ः। पाॅलीबैग पद्यति से गन्ना पौध तैयार करने के लिए प्रति पौध रू. 3/या लागत का 50 प्रतिशत अनुदान। बर्ड चिपर हेतु अनुदान कीमत का 50 प्रतिशत और अधिकतम रू. 2000 प्रति यंत्र।

जिंक सल्फेट हेतु अनुदान- कीमत का 50ः और अधिकतम रू. 500/ हे.अनुदान। बीजोपचार दवाई का 50 प्रतिशत अधिकतम रू. 100/- प्रति हे. का अनुदान। मानव चलित पौध संरक्षण यंत्र पर अधिकतम रू. 800/- प्रति यंत्र एवं शक्ति चलित पौध संरक्षण यंत्र अधिकतम रू. 2000/- प्रति यंत्र का अनुदान या 50ः। राज्य के अंदर गन्ना बीज परिवहन पर रू. 800/- प्रति टन एवं राज्य के बाहर गन्ना बीज परिवहन पर अधिकतम रू. 1200/- प्रति टन अनुदान देय है या 50ः।

सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

2. संयुक्त देयता समूह (JLG)

योजना का उद्देश्य संयुक्त देयता समूहों को प्रोत्साहन ऋण अनुदान प्रदान करना।
हितग्राही की पात्रता भूमिहीन कृषि मजदूर/सीमांत कृषक/वन अधिकार प्रमाण पत्र धारियों के संयुक्त देयता समूह।
मिलने वाले लाभ बैंक द्वारा समूहों को वितरित ऋण का 20 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रू. 5000/- समूह को दिया जाता है।
संपर्क बैंक एवं क्षेत्रीय कार्यकर्ता से सम्पर्क किया जा सकता है

3. जनजागरण अभियान के शिविरार्थियों को प्रोत्साहन

योजना का उद्देश्य राहत शिविरों में निवासरत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले समस्त कृषकों को सहायता देना।
हितग्राही की पात्रता राहत शिविरों में निवासरत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले समस्त कृषक।
मिलने वाले लाभ योजनांतर्गत प्रभावित कृषकों का धान एवं मक्का के प्रमाणित बीज निःशुल्क वितरण किया जाता है। इसी प्रकार ट्रैक्टर से निःशुल्क जुताई/ बुवाई की जाती है।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

4. फसल प्रदर्शन योजना
i. उपयोजना -द्वि-फसलीय क्षेत्र बढ़ाने हेतु रबी फसल प्रदर्शन कार्यक्रम

योजना का उद्देश्य कृषको को द्वि-फसलीय खेती के लिये प्रोत्साहित करना। रबी फसलांे के उन्नत कृषि तकनीक अपनाने हेतु कृषको को प्रोत्साहित कर रबी फसलो की उत्पादन/उत्पादकता में वृद्धि करना।
हितग्राही की पात्रता समस्त कृषक, लघु सीमांत अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला कृषको को प्राथमिकता।
मिलने वाला लाभ प्रति कृषक न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर एवं अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र तक सहायता की पात्रता होगी। फसल- चना/मटर/मसूर/गेहूं, के लिये रू. 5000/-, सरसों/सुरजमूखी के लिये रू. 4000 /- अलसी/अरण्डी/ कुसुम/ तिवड़ा के लिये रू. 3000/- प्रति प्रदर्शन प्रति हेक्टेयर का अधिकतम अनुदान धारित रकबे के अनुपात में देय है।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

ii. उपयोजना -ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन तिलहन एवं मक्का फसल को प्रोत्साहन योजना

योजना का उद्देश्य ग्रीष्मकालीन धान के विकल्प के रूप में दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल के क्षेत्र में वृद्धि कर उत्पादन को बढ़ावा देना।
हितग्राही की पात्रता समस्त कृषक लाभान्वित किये जाते हंै, परन्तु लघु सीमांत अनुसूचित जाति/ जनजाति एवं महिला कृषको को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाला लाभ प्रति कृषक न्यूनतम 0.4 हेक्टेयर के लिये रू. 2000 के मान से अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिये रू. 10000 का अनुदान देय होगा।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

5. कृषक प्रशिक्षण

योजना का उद्देश्य कृषक प्रशिक्षण केन्द्रों के माध्यम से कृषको को प्रशिक्षण देना।
हितग्राही की पात्रता समस्त कृषक लाभान्वित किये जाते है परन्तु लघु, सीमान्त, अनुसूचित जाति/ जनजाति एवं महिला कृषको को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाले लाभ 50 पुरूष एवं महिला कृषकों के लिये प्रशिक्षण अवधि तीन दिनों के लिये होगी। प्रत्येक 3 दिवसीय प्रशिक्षण हेतु रू. 7500/- का प्रावधान जिसमें से रू. 50/-प्रति दिन प्रति कृषक के मान से मानदेय प्रशिक्षणार्थियों को दिया जाना।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी/प्राचार्य, कृषक प्रशिक्षण केन्द्र।

6. जैविक खेती मिशन

योजना का उद्देश्य राज्य में जैविक खेती द्वारा लागत में कमी एवं टिकाऊ उत्पादकता प्राप्त करना, प्रमाणित जैविक खेती को बढ़ावा देना, जैविक उत्पादन प्रणाली में कृषकों का क्षमता विकास।
हितग्राही की पात्रता चयनित क्लस्टर में सम्मिलित सभी वर्ग एवं श्रेणी के कृषक।
मिलने वाले लाभ
  • जैविक कृषकों का 3 दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण रू. 750/- प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रति दिन।
  • जैविक कृषकों का 2 दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण रू. 13000/- प्रति प्रशिक्षण।
  • जैविक कृषकों का राज्य के बाहर दस दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण रू. 600/- प्रति कृषक प्रति दिन।
  • जैविक कृषि तकनीकी पर फसल प्रदर्शन रू. 10,000/- प्रति प्रदर्शन प्रति एकड़।
  • जैविक क्षेत्रों के सामुहिक जैविक प्रमाणीकरण हेतु अनुदान रू. 10,000/- प्रति हे. (3 वर्षो में)
  • जैविक खाद/कम्पोस्ट उत्पादन इकाई की स्थापना
    (अ) नाडेप टांका लागत का 50 प्रतिशत् या रू. 4000/- जो भी कम हो। (ब) वर्मी कम्पोस्ट लागत का 50 प्रतिशत् या रू. 8000/- जो भी कम हो।
  • जैविक खेती को बढ़ावा देने प्रतिवर्ष प्रदेश एवं जिला स्तर पर जैविक किसान मेला/सम्मेलन का आयोजन।
संपर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

7. खलिहान अग्नि दुर्घटना बीमा योजना

योजना का उद्देश्य कृषकों को खलिहान अग्नि दुर्घटना की स्थिति में बीमा का लाभ पहॅुचाना।
हितग्राही की पात्रता अग्नि दुर्घटना का तात्पर्य बाह्य दृष्टिगत दुर्घटना से अग्निकाण्ड अथवा ताड़ित/ प्राकृतिक आपदा अर्थात् हवा, यांत्रिकीकरण/मानवीय भूल एवं दंगे भी शामिल होगें। सार्वजनिक प्राधिकरण की आदेश पर फसल/उपज जलाई गई या स्वतः कृषक के द्वारा दुर्भावना से जलाई गई है, खेत में सुखाने की प्रक्रिया में क्षति होती है या बेमौसम बारिश से फसल क्षति होती है तो ऐसी क्षति इस योजना क्षेत्र के बाहर होगी एवं क्षतिपूर्ति राहत की पात्रता नहीं होगी।
मिलने वाले लाभ अधिकतम रू. 25000/- या वास्तविक आंकलित क्षति जो भी कम हो देय होगा।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

8. कृषि यंत्र सेवा केन्द्र की स्थापना योजना

योजना का उद्देश्य राज्य में उन्नत कृषि मशीनों/यंत्रो से कृषि कार्य को प्रोत्साहन, आर्थिक रूप से पिछडे कृषक जो प्रत्येक कार्य हेतु पृथक मशीन/यंत्र क्रय करने में समर्थ नही है उन्हें किराये पर उन्नत कृषि मशीनें/यंत्र उपलब्ध कराना, निजी क्षेत्र में कृषि उद्यमिता को बढ़ावा, ग्रामीण स्तर पर कृषको को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना आदि।
हितग्राही की पात्रता निजी क्षेत्र के इच्छुक कृषि उद्यमियों, स्व-सहायता समूहों (कम से कम 5 सदस्यीय) पंजीकृत सहकारी समितियों, को-आपरेटिव सोसायटी (प्राथमिक कृषि साख समिति) विपणन समिति, कृषि स्नातक/कृषि इंजीनियरिंग आवेदन को प्राथमिकता।
मिलने वाले लाभ सामान्य क्षेत्र के आवेदक को न्यूनतम रू 25.00 लाख के कृषि उपकरण एवं मशीन क्रय करने पर राशि रू. 10.00 लाख क्रेेडिट लिंक्ड बैंक, इंडेड सब्सिडी के रूप मेें देय होगा एवं उपयोजना क्षेत्र के आवेदक को न्यूनतम रू 25.00 लाख अथवा 15.00 लाख कृषि उपकरण एंव मशीन क्रय पर क्रमशः राशि रू 10.00 लाख अथवा 7.50 लाख के्रडिट लिंक्ड बैंक इण्डेड सब्सिडी के रूप में देय। स्ट्रा रीपर/स्ट्रा बेलर/मल्चर में से कोई एक यंत्र क्रय करने पर रू. 0. 25 लाख एवं हैप्पी सीडर पर रू. 0.25 लाख इस प्रकार कुल राशि रू. 0.50 लाख का अतिरिक्त अनुदान देय होगा।
सम्पर्क संभागीय कृषि यंत्री।

9. कृषि श्रमिको के दक्षता उन्नयन की योजना

योजना का उद्देश्य कृषि मजदूरों के कार्य को सरल बनाने एवं उनके समय की बचत।
हितग्राही की पात्रता पंजीकृत कृषि मजदूर समूह।
मिलने वाले लाभ कृषि कार्यो हेतु उपयोगी कषि यंत्र कीट लगभग राशि रू. 42,000/- तक का किट कृषि मजदूरों को निशुल्क, यंत्रों के उपयोग एवं रख-रखाव के संबंध में कृषक समुह को दो दिवसीय प्रशिक्षण।
संपर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

10. शाकम्भरी योजना

योजना का उद्देश्य सिंचाई संसाधनांे का विकास करना।
हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के लघु/सीमांत कृषक
मिलने वाला लाभ कूप निर्माण हेतु अधिकतम इकाई लागत रू. 25200 अथवा वास्तविक लागत का 50 प्रतिशत जो भी कम हो अनुदान देय है। विभिन्न स्थानों पर भूमि के प्रकार जैसे - कड़ी चट्टान या कछारी भूमि एवं कूप के आकार के आधार पर इकाई लागत तय होती है। 0.5 से 5.00 हाॅर्स पावर के आई.एस.आई. मार्क सिंचाई पम्प जैसे - डीजल/विद्युत/पेट्रोल/ओपनवेैल सबर्मिसबल पम्प पर वास्तविक लागत का 75 प्रतिशत अथवा अधिकतम राशि रू. 16875/- अनुदान देने का प्रावधान है।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

11. लघुत्तम सिंचाई (तालाब) निर्माण

योजना का उद्देश्य सुरक्षात्मक सिंचाई उपलब्ध कराना।
  योजनांतर्गत 40 हेक्टेयर तक सिंचाई क्षमता वाले तालाबों का निर्माण शत्-प्रतिशत शासकीय व्यय पर किया जाता है।

12. किसान समृद्धि योजना (KSY)

योजना का उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध भू-जल का नलकूपों द्वारा समुचित उपयोग एवं फसलों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराकर उत्पादकता एवं फसल सघनता में वृद्धि करना।
हितग्राही की पात्रता सभी श्रेणी के कृषक योजना में लाभान्वित किये जाते है, परन्तु लघु, सीमांत, कृषकों को प्राथमिकता दी जाती है।
मिलने वाले लाभ नलकूप खनन एवं पम्प प्रतिस्थापन हेतु अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को अधिकतम रू. 43000/- एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के कृषकों को अधिकतम रू. 35000/- तथा सामान्य वर्ग के कृषकों को अधिकतम रू. 25000/- अनुदान दिया जाता है।
सम्पर्क क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन उप योजना के लिए 12वीं योजना के दौरान एकीकृत बागवानी 

विकास मिशन के तहत लागत मानदंड एवं सहायता का प्रतिमान

                                                         चयनित जिले -1. बिलासपुर, 2. दुर्ग, 3. कबीरधाम, 4. रायगढ़, 5. कोरबा, 6. सरगुजा, 7. जगदलपुर, 8. रायपुर, 9. कोरिया,

10. जशपुर 11. राजनांदगांव 12. मुंगेली, 13. बेमेतरा, 14. बालोद 15. बलरामपुर 16. सूरजपुर 17. कोंडागांव 18. गरियाबंद 19 बलौदाबाजार 

प्राथमिकता वाली फसलें -

  1. फलदार - आम, काजू, नीबू, लीची, आंवला, बेर, केला, बेल, सीताफल, अमरूद
  2. मसाले - मिर्च, अदरक, धनिया, हल्दी, लहसुन एवं मैथी
  3. पुष्प - गुलाब, जरबेरा, गेंदा, सेवंती, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस, गैलार्डिया
  4. औषधीय एवं सुगंधीय - लेमनग्रास, सिट्रीडोरा, एलोवेरा, खस एवं पामारोजा
  5. सब्जी- टमाटर, बैंगन, भिंन्ड़ी आदि सब्जियों की संकर किस्में।

B. उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित योजनाएं

1. राज्य पोषित योजनाएं
अनुदान की पात्रता एवं मापदंड:-

क्र. योजना का नाम शासन द्वारा दी जा रही सुविधायें
  फल पौध रोपण योजना

i. प्रदेश में आम के क्षेत्र में विस्तार एवं फल उत्पादन में वृद्धि करने के लिए इस योजना के अंतर्गत भू-स्वामी कृषक को आम फलोद्यान रोपण पर प्रति हेक्टेयर लागत राशि रू. 43,750.00 पर 25 प्रतिशत अनुदान राशि रू. 10.938.00 पांच वर्षो में देने का प्रावधान है, जिसमें प्रति कृषक न्यूनतम 0.25 हे. एवं अधिकतम 2 हे. तक अनुदान देने का प्रावधान है।

ii. आम, बेर, आंवला के देशी वृक्षों को उन्नतशील किस्मों में परिवर्तन हेतु प्रशिक्षित बेरोजगार युवकों के द्वारा किये गये टाॅप वर्किंग कार्य पर (जब शाखा लगभग 2 फीट की हो जावे) राशि रू. 10.00 प्रति सफल परिवर्तित वृक्ष पारिश्रमिक दिये जाने का प्रावधान है।

  नदी कछार/तटों पर लघु सब्जी उत्पादक समुदायों को प्रोत्साहन की योजना नदी कछार/तटीय क्षेत्रों में खेती करने वाले बी.पी.एल. एवं लघु/सीमांत कृषकों को लाभान्वित करने की नवीन योजना है। योजनांतर्गत प्रति हितग्राही न्यूनतम 0.25 हे. एवं 0.4 हे. क्षेत्र हेतु लाभ देने का प्रावधान है। 0.4 हे. क्षेत्र के अनुमानित लागत राशि रू. 9400.00 पर 50 प्रतिॉात अधिकतम राशि रू. 4700.00 अनुदान की पात्रता होगी।
  बी.पी.एल. एवं लघु/सीमांत कृषक बाड़ी में टपक सिंचाई योजना (500 वर्गमी.) बी.पी.एल. एवं लघु/सीमांत कृषकों का लाभान्वित करने की नवीन योजना है जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को प्राथमिकता दी जावेंगी। योजनांतर्गत प्रति हितग्राही 0.05. हे. (500 वर्ग मी.) क्षेत्र में टपक सिंचाई पद्धति प्रतिस्थापन हेतु राशि रू. 18000.00 की अनुमानित लागत पर 75 प्रतिॉात अधिकतम राशि रू. 13500.00 अनुदान का प्रावधान है।
  राज्य पोषित सूक्ष्म सिंचाई योजना यह योजना राज्य सरकार द्वारा कृषकों को ड्रिप सिंचाई पर अनुदान देने के उद्देश्य से वर्ष 2012-13 से राज्य के संपूर्ण जिलों में लागू की गई है। योजनांतर्गत अनुमानित लागत का लघु एवं सीमांत कृषकों को 70 प्रतिशत अनुदान एवं बड़े कृषकों को 50 प्रतिशत अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।(अधिकतम रकबा 2.00 हेक्टेयर)
  कम्प्यूनिटी फेंसिंग योजना इस योजना के अंतर्गत हितग्राहियों के समूह को न्यूनतम 0.50 हे. एवं अधिकतम 2.00 हे. तक चेयनलिंग फेसिंग हेतु इकाई लागत पर 50 प्रतिशत् अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।
  सब्जी फसलों के विविधिकरण हेतु प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण  कार्यक्रम मिर्च, टमाटर, अरबी, फुलगोभी के प्रदर्शन एवं प्रदर्शन हेतु 0.10 हे. के लिये मिर्च, टमाटर, फुलगोभी पर राशि रू 3000.00 तथा अरबी पर राशि रू 5400.00 का शत प्रतिशत अनुदान दिये जाने प्रावधान है। योजना दुर्ग, बेमेतरा, रायगढ़ एवं जशपुर जिले के चयनित विकासखंडों में संचालित है।
  पीपरमेंट क्षेत्र विस्तार पीपरमेंट की खेती हेतु ईकाई लागत राशि रू 40000.00 का 40 प्रतिशत राशि रू 16000.00 एवं पीपरमेंट प्रसंस्करण यूनिट का ईकाई लागत राशि रू 300000.00 का 75 प्रतिशत राशि रू. 225000.00 अनुदान कृषकों को दिये जाने का प्रावधान है। योजना जिला सरगुजा, बलरामपुर, कोरिया, सूरजपुर एवं जशपुर में संचालित है।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना
2. राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजनान्तर्गत अनुदान एवं पात्रता

क्रं. घटक संभावित कुल लागत विवरण विवरण अधिकतम अनुदान
  रोपण अधोसंरचना एवं विकास        
1. रोपण सामग्री का उत्पादन -        
  (शासकीय क्षेत्र में कुल लागत का 100ः एवं निजी क्षेत्र में 35ः से 50ः अनुदान)-        
  i.हाईटेक नर्सरी - (4 हे.) रू. 25 लाख प्रति हे.

शासकीय क्षेत्र (100%)

4 हे. क्षेत्र तक प्रति नर्सरी एवं प्रति हे. न्यूनतम 50,000 पौधों का उत्पादन प्रतिवर्ष रू.100.00 लाख
    रू. 25 लाख प्रति हे. निजी क्षेत्र (40% अनुदान) बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने पर 4 हे. क्षेत्र तक प्रति नर्सरी एवं प्रति हे. न्यूनतम 50,000 पौधों का उत्पादन प्रतिवर्ष रू .40.00 लाख
  ii. छोटी नर्सरी - (1 हे.) रू.15 लाख प्रति नर्सरी शासकीय क्षेत्र (100%) न्यूनतम 1 हे. क्षेत्र प्रति नर्सरी एवं प्रति वर्ष न्यूनतम 25.000 पौधों का उत्पादन रू. 15.00 लाख
    रू.15 लाख प्रति नर्सरी निजी क्षेत्र (50% अनुदान) बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने पर न्यूनतम 1 हे. क्षेत्र प्रति नर्सरी एवं प्रति वर्ष न्यूनतम 25.000 पौधों का उत्पादन रू. 7.50 लाख
  iii. पुरानी नर्सिरियो का जीर्णोद्धार- (4 हे.) रू. 10 लाख प्रति नर्सरी शासकीय क्षेत्र (100%)   रू.10.00 लाख
    रू. 10 लाख प्रति नर्सरी निजी क्षेत्र (50% अनुदान)   रू.5.00 लाख
  iv. नवीन टिशु कल्चर यूनिट की स्थापना रू. 250.00 लाख प्रति यूनिट शासकीय क्षेत्र (100%) प्रत्येक टिशु कल्चर यूनिट अधिदेशित फसल की न्यूनतम 25 लाख पौधों का उत्पादन रू. 250.00 लाख
    रू. 250.00 लाख प्रति यूनिट निजी क्षेत्र (40% अनुदान) बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने पर प्रत्येक टिशु कल्चर यूनिट अधिदेशित फसल की न्यूनतम 25 लाख पौधों का उत्पादन रू. 100.00 लाख
  v.विद्यमान टिशु कल्चर (टीसी) यूनिटों का पुनर्वास
 
रू. 20.00 लाख प्रति यूनिट शासकीय क्षेत्र (100%)   रू. 20.00 लाख
    रू. 20.00 लाख प्रति यूनिट निजी क्षेत्र (50% अनुदान)
 
  रू.10.00 लाख
  vi.सब्जी के बीजों का उत्पादन तथा वितरण(open pollinated) रू. 35,000.00 प्रति हे. शासकीय क्षेत्र (100%) प्रति हितग्राही 5 हे. तक सीमित होगा, रू. 35,000.00 प्रति हे.
    रू. 35,000.00 प्रति हे. निजी क्षेत्र (35% अनुदान) प्रति हितग्राही 5 हे. तक सीमित होगा, रू. 12,250.00 प्रति हे.
  vii.सब्जी के बीजों का उत्पादन तथा वितरण (Hybrid) रू.1.50 लाख प्रति हे. शासकीय क्षेत्र (100%) प्रति हितग्राही 5 हे. तक सीमित होगा, आधार बीज के उत्पादन हेतु ब्रीडर बीज की मांग करने वाले संगठन आई.सी.ए.आर/एस.ए.यू से ब्रीडर बीज की अधिप्राप्ति की लागत पर 25 प्रतिशत की सहायता हेतु पात्र होंगे। रू. 1.50 लाख प्रति हे.
    रू.1.50 लाख प्रति हे. निजी क्षेत्र (35% अनुदान) प्रति हितग्राही 5 हे. तक सीमित होगा, आधार बीज के उत्पादन हेतु ब्रीडर बीज की मांग करने वाले संगठन आई.सी.ए.आर/एस.ए.यू से ब्रीडर बीज की अधिप्राप्ति की लागत पर 25 प्रतिशत की सहायता हेतु पात्र होंगे। रू. 75,000.00 प्रति हे.
  बीज अधोसंरचना (बागवानी फसलों के बीजों की हैण्डलिंग, प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण आदि हेतु) रू. 200.00 लाख परियोजना प्रस्ताव के आधार पर शासकीय क्षेत्र (100%) शासकीय क्षेत्र में बीज अधोसंरचना विकास के अन्तर्गत परियोजना प्रस्ताव के आधार पर 100 प्रतिशत अनुदान एवं निजी क्षेत्र के प्रस्ताव के आधार पर 50 प्रतिशत अनुदान प्रति हितग्राही बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने पर
रू .200.00 लाख परियोजना प्रस्ताव के आधार पर
रू. 200.00 लाख परियोजना प्रस्ताव के आधार पर
    रू. 200.00 लाख परियोजना प्रस्ताव के आधार पर निजी क्षेत्र (50% अनुदान) शासकीय क्षेत्र में बीज अधोसंरचना विकास के अन्तर्गत परियोजना प्रस्ताव के आधार पर 100 प्रतिशत अनुदान एवं निजी क्षेत्र के प्रस्ताव के आधार पर 50 प्रतिशत अनुदान प्रति हितग्राही बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने पर
रू .200.00 लाख परियोजना प्रस्ताव के आधार पर
रू. 100.00 लाख परियोजना प्रस्ताव के आधार पर

 

क्रं. घटक संभावित कुल लागत विवरण अधिकतम अनुदान
  नये उद्यानों की स्थापना -      
  1. फल -      
  ज्यादा लागत वाली फलदार पौधों का रोपण (अधिकतम 4 हें. प्रति हितग्राही)       
  i. अंगूर, किवी, पैसन फ्रूट आदि      
  a. ड्रिप सिचाई, ट्रेलीस, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 4.00 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 1.60 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू. 1.60 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, ट्रेलीस, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू. 1.25 लाख प्रति हे कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.50 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू. 0.50 लाख
  ii. स्ट्राबेरी      
  ड्रिप सिचाई, मल्चिगं, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू.2.8 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 1.12 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू.1.12 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, मल्चिगं, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू.1.25 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.50 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू. 0.50 लाख
  iii. केला (सकर)      
  a. ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 2.00 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.80 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 0.80 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू .87,500 प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.35 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 0.35 लाख
  iv. केला (टिशू कल्चर)      
  a. ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 3.00 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 1.20 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 1.20 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू. 1.25 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.50 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 0.50 लाख
  v. अनानास (सकर)      
  a. ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 3.00 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 1.20 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 1.20 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू .87,500 प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.35 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 0.35 लाख
  vi. अनानास (टिशू कल्चर)      
  a. ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 5.50 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 2.20 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 2.20 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू. 1.25 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.50 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 0.50 लाख
  vii. पपीता      
  a. ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 2.00 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.80 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 0.80 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू .0.60 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.30 लाख प्रति हे. की दर से दो किस्तों में 75ः25। रू. 0.30 लाख
  viii. अति सघन फल पौध रोपण (Meadow archard)      
  a. ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 2.00 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.80 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू. 0.80 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू. 1.25 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.50 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू. 0.50 लाख
  xi. सघन फल पौध रोपण (High Density Planting) आम, अमरूद, लिचि, अनार, नीबू      
  a. ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के साथ रू. 1.50 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.60 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू. 0.60 लाख
  b. बिना ड्रिप सिचाई, समन्वित पौध प्रबंधन सुविधा के रू. 1.00 लाख प्रति हे. कुल लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम रू. 0.40 लाख प्रति हे. की दर से तीन किस्तों में 60ः20ः20 यदि जीवित पौधों का प्रतिशत 75 प्रतिशत द्वितीय वर्ष में तथा 90 प्रतिशत तृतीय वर्ष में। रू. 0.40 लाख
         

 

3. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

इस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत संचालित योजनाएॅं उन्हीं के मापदण्ड के अनुरूप ऐसे जिलों में संचालित किये जाते है, जहाॅं राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना संचालित नहीं है। योजनांतर्गत संकर सब्जियों के मिनिकिट एवं प्रदर्शन आयोजित किये जाते है तथा क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत आवश्यक आदान सामग्री जैसे - बीज, खाद, दवा के इकाई लागत 25000.00 पर अधिकतम 12500.00 रू. का अनुदान दिया जाता है। साथ ही साथ विभागीय रोपणियों में अधोसंरचना जैसे - प्लग टाईप सीडलिंग यूनिट एवं आवश्यकता अनुसार शासकीय क्षेत्र में नई रोपणियों की स्थापना भी शत्-प्रतिशत अनुदान पर किये जा रहे है।

4. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
(1) आयल पाॅम क्षेत्र विस्तार योजना -

योजना के पात्रता एवं मापदंड निम्नानुसार है:-
 

क्र. विवरण इकाई स्वीकृत सहायता दर
I क्षेत्र विस्तार    
a पौध रोपण सामग्री हेक्टेयर रू. 12,000.00 प्रति हेेक्टेयर
b रोपण/रखरखाव    
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति हेक्टेयर
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति हेक्टेयर
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति हेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति हेक्टेयर
II जल संवर्धन घटक    
a टपक सिंचाई हेक्टेयर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के मापदंडों के अनुरूप
b नलकूप संख्या लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम रू. 50,000.00 प्रति नलकूप
c डीजल पंप सेट संख्या लागत का 50 प्रतिशत एवं अधिकतम रू. 15,000.00 प्रति पंप सेट
d इनपुट आफ इन्टर क्रापिंग इन आयल पाॅम प्रक्षेत्र    
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति हेक्टेयर
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति हेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 5,000.00 प्रति हेक्टेयर
e वर्मी कम्पोस्ट संख्या रू. 15,000.00 प्रति इकाई
f कृषक प्रशिक्षण संख्या रू. 24,000.00 प्रति प्रशिक्षण

चयनित जिले - रायपुर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, महासमुंद, दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर, कोरबा, रायगढ़, जगदलपुर, कोण्डागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर एवं बीजापुर।

(2) आलिव आयल (जैतून) एवं महुआ की खेती

क्र. विवरण इकाई स्वीकृत सहायता दर  
      आलिव महुआ
I. क्षेत्र विस्तार      
a पौध रोपण सामग्री हेक्टेयर रू. 48,000.00 प्रति हेेक्टेयर रू. 1,5000.00 प्रति हेक्टेयर
b रखरखाव      
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 3,200.00 प्रति हेक्टेयर रू. 2000.00 प्रति हेक्टेयर
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 3,200.00 प्रति हेक्टेयर रू. 2000.00 प्रति हेक्टेयर
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 3,200.00 प्रति हेक्टेयर रू. 2000.00 प्रति हेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 3,200.00 प्रति हेक्टेयर रू. 2000.00 प्रति हेक्टेयर
c अंतराशस्य      
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर रू. 1,000.00 प्रति हेक्टेयर

चयनित जिले - बिलासपुर, जशपुर, सरगुजा एवं बलरामपुर

महुआ की खेती हेतु चयनित जिले - बिलासपुर, जांजगीर, रायगढ़, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, जगदलपुर, कोण्डागांव, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर

5. नेशनल मिशन आन एग्रोफारेस्ट

क्र. विवरण इकाई स्वीकृत सहायता दर
i. ब्लाक प्लांटेशन    
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 6,000.00 प्रति हेेक्टेयर
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 3,000.00 प्रति हेेक्टेयर
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 3,000.00 प्रति हेेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 3,000.00 प्रति हेेक्टेयर
ii. बाऊण्ड्री प्लांटेशन    
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 5,600.00 प्रति हेेक्टेयर
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 2,800.00 प्रति हेेक्टेयर
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 2,800.00 प्रति हेेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 2,800.00 प्रति हेेक्टेयर
क्र. विवरण इकाई स्वीकृत सहायता दर
iii. रोपणी स्थापना (शासकीय क्षेत्र)    
  हाईटेक नर्सरी प्रति रोपणी रू. 40.00 लाख प्रति रोपणी
  बड़ी नर्सरी प्रति रोपणी रू. 16.00 लाख प्रति रोपणी
  छोटी नर्सरी प्रति रोपणी रू. 10.00 लाख प्रति रोपणी

6. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई)

(ड्रिप सिंचाई) के तहत सहायता का प्रतिमान

  यह केन्द्र प्रवर्तित योजना हैैं। योजना का उद्देश्य उपलब्ध जल स्त्रोत से अधिक से अधिक सिंचित रकबा को बढ़ाना है।

     योजनांतर्गत लघु एवं सीमान्त कृषकों को 70 प्रतिशत एवं सामान्य कृषकों को 50 प्रतिशत अनुदान अधिकतम जोत सीमा

5 हेक्टेयर तक दिये जाने का प्रावधान है।

7. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना/पुर्नगठित मौसम आधारित
फसल बीमा योजना (RWBICS)

पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBICS) के लिये योग्यता:-

इस योजना के तहत राज्य का कोई भी किसान बीमा करवा सकता है। यह योजना ऋणी कृषकों के लिए अनिवार्य तथा अऋणी कृषकों हेतु ऐच्छिक होगी।

मौसम फसल किसान द्वारा देय अधिकतम प्रीमियम राशि
खरीफ एवं रबी खरीफ-टमाटर, बैगन, पपीता, केला, अमरूद, मिर्च, अदरक, रबी-टमाटर, बैगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, प्याज, आलू बीमित राशि का 5 प्रतिशत

कृषक प्रीमियम, बीमित राशि का 5 प्रतिशत जो कि किसान द्वारा देय होगा। प्रीमियम के अंतर की राशि सामान्य प्रीमियम सब्सिडी होगी, जो केन्द्र एवं राज्य द्वारा सामान्य रूप से 50ः50 प्रतिशत पर वहन किये जायेंगे।

शामिल किये जाने वाली जोखिम:-

  • वर्षा - कम वर्षा, अधिक वर्षा, बैमौसम वर्षा, लगातार सुखे के दिन, वास्तविक प्रीमियम से, तापमान- अधिक तापमान, कम तापमान,बीमारी अनुकूल मौसम (कीट एवं व्याधि), वायु गति, ओला वृष्टि।

आयल पाॅम क्षेत्र विस्तार योजना

केन्द्रीय सहायता से संचालित आयल पाॅम क्षेत्र विस्तार योजना राज्य के जिले दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, जगदलपुर, कांेडागांव, नारायणपुर, कांकेर, रायपुर, दुर्ग, जांजगीर-चांपा, महासमुंद एवं बालोद में संचालित है ।

योजना के पात्रता एवं मापदंड निम्नानुसार है:-

क्र. विवरण इकाई स्वीकृत सहायता दर
I क्षेत्र विस्तार    
(a) पौध रोपण सामग्री हेक्टेयर रू. 8,000.00 प्रति हेेक्टेयर
(b) रोपण/रखरखाव    
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 4,000.00 प्रति हेक्टेयर
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 4,000.00 प्रति हेक्टेयर
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 4,000.00 प्रति हेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 4,000.00 प्रति हेक्टेयर
II. संवर्धन घटक    

(a)

टपक सिंचाई हेक्टेयर राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई योजना के मापदंडों के अनुरूप रू. 10,600.00 प्रति हेक्टेयर
(b) नलकूप संख्या लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम रू. 25,000.00 प्रति नलकूप
(c) डीजल पंप सेट संख्या लागत का 50 प्रतिशत एवं अधिकतम रू. 15,000.00 प्रति पंप सेट
(d) इनपुट आफ इन्टर क्रापिंग इन आयल पाॅम प्रक्षेत्र    
  प्रथम वर्ष हेक्टेयर रू. 3,000.00 प्रति
  द्वितीय वर्ष हेक्टेयर रू. 3,000.00 प्रति हेक्टेयर
  तृतीय वर्ष हेक्टेयर रू. 3,000.00 प्रति हेक्टेयर
  चतुर्थ वर्ष हेक्टेयर रू. 3,000.00 प्रति हेक्टेयर
(e) वर्मी कम्पोस्ट संख्या रू. 15,000.00 प्रति इकाई
(f) कृषक प्रशिक्षण संख्या रू. 24,000.00 प्रति प्रशिक्षण

लघु कृषक, कृषि व्यापार संघ (SFAC)

(भारत सरकार कृषि मंत्रालय की संस्था)

संस्था द्वारा संचालित मुख्य योजनाए:-

1. उद्यम पूंजी योजना

2.शेयर पूॅंजी अनुदान

3. ऋण गारंटी योजना

1. उद्यम पूूॅंजी योजना:
लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एस.एफ.ए.सी.) एक पंजीकृत संस्था है जो कृषि एवं सहकारिता विभाग, भारत सरकार के तहत काम कर रही है। इस संस्था को कृषि व्यापार परियोजनाओं की स्थापना के लिए निजी निवेश उत्प्रेरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि ग्रामीण आय और रोजगार को बढ़ाया जा सके। कृषि व्यवसाय परियोजनाओं तथा परियोजना विकास सुविधा (पीडीएफ) के गठन द्वारा व्यक्तियों, उत्पादक वर्गाे/संगठनों के लिए आर्थिक तौर पर व्यवहारिक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में सहायता प्रदान कर एस.एफ.ए.सी. स्कीम के तहत कृषि व्यापार को बढ़ाने के लिए व्याज मुक्त उद्यम पूंजी प्रदान की जाती है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को बैंक सावधिक ऋण/कार्यशील पूंजी के साथ-साथ उद्यम पूंजी सुलभ कराने के लिए एकल खिड़की दृष्टिकोण की परिकल्पना की गई है। एस.एफ.ए.सी. राष्ट्रीयकृत बैंकों, भारतीय स्टेट बैंक और इसके सहायक बैकों, आईडीबीआई, एसआईडीबीआई, नाबार्ड, एनसीडीसी, एनईडीएफआई, एक्जीम बैंक, आरआरबी और राज्य वित्तीय निगम के साथ निकटतम सहयोग के साथ इन योजनाओं को लागू करेगा।

उद्देशय:- योजना के मुख्य उद्देशय निम्न है:-

क. बैकों में नजदीकी सहयोग से कृषि उद्यमों की स्थापना में मदद करना।

ख. कृषि व्यापार परियोजनाओं की स्थापना के लिए निजी निवेश को प्रेरित करना तथा इसके जरिये उत्पादों के लिए सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना ताकि ग्रामीण आय और रोजगार को बढ़ाया जा सकें।

ग. कृषि व्यापार परियोजनाओं का उत्पादकों के साथ संपर्क सुदृढ़ करके उत्पादकों से कच्चा माल जुटाने की गतिविधियों में मदद करना।

घ. परियोजना विकास सुविधा के माध्यम से मूल्य श्रृंखला में किसानों, उत्पादक समूहों/कम्पनी और कृषि विज्ञान स्नातकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद करना।

योजना की उल्लेखनीय विशेषताएं:-

योग्य व्यक्ति:

इस योजना के तहत निम्न को सहायता उपलब्ध है:-

व्यक्तियों

  • किसान
  • किसान उत्पादन कम्पनियां
  • किसान उत्पादक संगठन
  • साझेदार/प्रोपराइटी फर्मो
  • स्वयं-सहायता समूहों

कंपनियों

  • कृषि उद्यमियों
  • कृषि निर्यात क्षेत्र की इकाईयों
  • व्यक्तिगत अथवा सामूहिक स्तर पर कृषि स्नाताकों

पात्रता रखने वाली परियोजनाएं:-

क. परियोजना कृषि अथवा इससे सम्बद्ध क्षेत्र या कृषि सेवाओं से संबंधित होनी चाहिये । पोल्ट्री (मुर्गीपालन) और डेयरी उत्पादों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

ख. परियोजना में किसानों/उत्पादक समूहों को सुनिश्चित बाजार प्रदान किया जाना चाहिए।

ग. परियोजना के तहत किसानों को अधिक मूल्य वाली फसलों के विविधीकरण हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहियें।

घ. बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं द्वारा सावधिक ऋण के लिए परियोजना स्वीकार्य होनी चाहियें।

उद्यम पूंजी सहायता:- परियोजना की लागत के संबंध में ब्याज मुक्त वित्त उपलब्ध कराने के साधनों के तहत सावधिक ऋण स्वीकृत करने वाले प्राधिकरण द्वारा सुलभ ऋण के वित्तीय अंतर को पूरा करने के लिए एस.एफ.ए.सी. कृषि व्यवसाय परियोजनाओं को उद्यम पूजी उपलब्ध कराती है। एस.एफ.ए.सी. द्वारा उद्यम पूंजी सहायता की राशि निम्नानुसार न्यूनतम होगी -

  • प्रमोटर (प्रवर्तक) की इक्विटी का 26 प्रतिशत।
  • रू. 50 लाख

हालांकि पूर्वोत्तर क्षेत्र एवं पहाड़ी राज्यों (हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं काश्मीर और उत्तराखंड) में कृषि व्यापार परियोजना का प्रवर्तन किसी पंजीकृत किसान उत्पादक संगठन द्वारा किया जाएगा उद्यम पूंजी की राशि निम्नानुसार न्यूनतम होगी -

  • प्रमोटर (प्रवर्तक) की इक्विटी का 40 प्रतिशत।
  • रू. 50 लाख

2. शेयर पूंजी अनुदान
किसान उत्पादक कंपनी के लिए शेयर पूंजी अनुदान निधि (ईजीएफ) योजना
क्या है शेयर पूंजी अनुदान निधि

  • शेयर पूंजी अनुदान निधि, किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े किसानों को सशक्त बनाने हेतु एक केन्द्रीय योजना है।
  • इस योजना को लघु कृषक कृषि व्यापार संघ द्वारा संचालित किया जाता है।
  • यह योजना किसान उत्पादक कंपनियों के शेयर पंूजी आधार को मजबूत बनाने में सहायता प्रदान करती है।
  • यह योजना पात्र किसान - उत्पादक कंपनी के शेयर धारक सदस्यों को शेयर पूंजी अंशदान के बराबर राशि अनुदान में प्राप्त करने में समर्थ बनाती है।
  • यह किसान - उत्पादक कंपनी के समग्र पंूजी आधार में वृद्धि करती है।
  • यह योजना नए व उभरते हुए किसान - उत्पादक कंपनियों की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती है।
  • निदे‛शक मंडल (बी ओ डी) में कम से कम 5 सदस्य हो तथा अनिवार्य रूप से एक महिला सदस्य भी हो।
  • एक प्रबंध समिति, जो किसान-उत्पादक कंपनी के कारोबार के लिए जिम्मेदार हो।
  • अगले 18 महिनों के लिए संपोषणीय राजस्व प्रतिमान पर आधारित एक कारोबार योजना एवं बजट हो।
  • किसी अधिसूचित बैंक में किसान-उत्पादक कंपनी का खाता हो।
  • न्यूनतम , एक पूर्ण वित्त वर्ष के लिए किसी सनदी लेखाकार (सी ए) द्वारा लेखा परीक्षित लेखा विवरण हो।

शेयर पूंजी अनुदान निधि के उद्देश्य:-

  • किसान - उत्पादक कंपनियों की व्यवहार्यता एवं संपोषणीयता में वृृद्धि करना।
  • ऋण हेतु किसान - उत्पादक कंपनियों की उपयुक्ता में बढ़ोत्तरी करना।
  • किसान - उत्पादक कंपनी के सदस्यों की शेयर पूंजी में वृद्धि करना।
  • किसान - उत्पादक कंपनी के सदस्यों के स्वामित्व एवं भागीदारी में वृद्धि को सुनिश्चित करना।

शेयर पूंजी अनुदान निधि के लिए आवेदन की प्रक्रिया:-

  • आवेदन के लिए शेयर धारक सूची तथा सदस्यों के शेयर पूंजी अंशदान का विवरण किसी सनदी लेखाकार (सी ए) द्वारा सत्यापित व प्रमाणित होना चाहिए।
  • शाखा प्रबंधक द्वारा प्रमाणित बैंक खाता विवरण की छायाप्रति का होना अनिवार्य है।
  • अगले 18 महीनों के लिए किसान-उत्पादक कंपनी के कारोबार योजना एवं बजट का होना अनिवार्य है।
  • आवेदन पत्र तथा संलग्न सभी दस्तावेजों केे प्रत्येक पृष्ठ पर किसान-उत्पादक कंपनी के कम से कम दो बोेर्ड सदस्यों या अधिकृत प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर होने चाहिए।

योजना हेतु किसान - उत्पादक कंपनियों के लिए पात्रता के मापदंड:-

  • किसान - उत्पादक कंपनी विधिवत रूप से भारतीय कंपनी एक्ट 1956 के भाग 9 (ए) के अन्तर्गत पंजीकृत है।
  • संस्था के अंतर्नियमों/ उपनियमों में दिए प्रावधानों के अनुसार सदस्यों से शेयर पूंजी जुटायी गई हो।
  • इसके व्यक्तिगत शेयर धारकों की संख्या 50 से कम न हो।
  • इसकी संदत्त शेयर पूंजी 30 लाख रू. से अधिक न हो।
  • न्यूनतम 33 प्रतिशत शेयर धारक छोटे, सीमांत एवं भूमिहीन किसान होने चाहिए।
  • संस्थानिक सदस्य से भिन्न किसी एक सदस्य द्धारा धारित शेयरों की अधिकतम संख्या किसान - उत्पादक कंपनी की कुल शेयरों पूंजी के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • किसी संस्थानिक सदस्य द्धारा धारित शेयरों की अधिकतम संख्या किसान- उत्पादक कंपनी की कुल शेयरों पूंजी के 10 प्रतिशत से अधिक न हो।

योजना की स्वीकृति:-

  • इस योजना के तहत प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन करने हेतु एक शेयर पूंजी अनुदान स्वीकृति समिति (ईजीएससी) का गठन किया जाएगा।
  • समिति में 4 सदस्य होंगे तथा लघु कृषक कृषि व्यापार संघ के प्रबंध निदेशक इसके अध्यक्ष होंगे।
  • शेयर पूंजी अनुदान प्रत्येक किसान उत्पादक कंपनी के लिए 10 लाख रूपए की अधिकतम ऊपरी सीमा के अधीन नगद सहायता के रूप में होगा।
  • यह राशि किसान - उत्पादक कंपनी में शेयर धारकों की शेयर पूंजी की राशि के बराबर होगी।
  • स्वीकृत शेयर पूंजी अनुदान को किसान- उत्पादक कंपनी के बैंक खाते में सीधे अंतरित किया जाएगा।
  • शेयरपूंजी अनुदान प्राप्त करने की तारीख से 45 दिन के अंदर किसान - उत्पादक कंपनी अपने शेयर धारक सदस्यों को अतिरिक्त शेयर जारी करेगी।

3. ऋण गारंटी योजना
किसान उत्पादक कंपनी के लिए ऋण निधि (सीजीएफ) योजना क्या है ऋण गारंटी निधि

  • ऋण गारंटी निधि एक केंद्रीय योजना है।
  • यह योजना पात्र ऋणदाता संस्थाओं को ऋण गारंटी की रकम उपलब्ध कराती है
  • इस योजना के तहत किसान उत्पादक कंपनियों को बिना किसी जमानत के ऋण
  • मुहैया किया जाता है
  • इस योजना का संचालन लघु कृषक व्यापार संघ द्धारा किया जाता है।

योजना की स्वीकृति:-

  • योजना के तहत पात्र ऋणदाता संस्था को गारंटी की रकम स्वीकृत करने से पूर्व, लघु कृषक व्यापार संघ (एसएफएसी) द्धारा प्रस्ताव की बारिकी से जांच की जाएगी।
  • ऋणदाता संस्था या ऋणग्राही के लेखा बहियों तथा अन्य अभिलेखों का निरीक्षण किया जाएगा।
  • यह निरीक्षण लघु कृषक उनके द्धारा नियुक्त किसी अन्य एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा।
  • निवेश एवं दावा निपटारा समिति (आई एडं सी एस सी ) संबंधित बैंक को गारंटी की रकम स्वीकृत करेगी।

ऋण गारंटी निधि के उद्देश्य:-

  • ऋण गारंटी निधि का गठन पात्र ऋणदाता संस्थाआंे को ऋण गारंटी रकम उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया है।
  • इसक तहत ऋणदाता संस्था बिना जमानत, किसान उत्पादक कंपनियों को 100 लाख रूपए तक का ऋण प्रदान कर सकेगे।
  • यह योजना ऋण प्रदान करने के उनके जोखिम को कम कर करेगी।

योजना हेतु किसान-उत्पादक कंपनियों के लिए पात्रता के मापदंड:-

  • किसान-उत्पादक कंपनी का विधिवत रूप से पंजीकृत होना अनिवार्य है।
  • संस्था के अंर्तनियमों व उप नियमों में दिए प्रावधानों के अनुसार सदस्यों से शेयर पूंजी जुटायी गई हो।
  • इसके व्यक्तिगत शेयर धारकों की संख्या 500 से कम नहीं होनी चाहिए।
  • न्यूनतम 33 प्रतिशत शेयर धारक छोटे, सीमांत एवं भूमिहीन किसान होने चाहिए।
  • संस्थानिक सदस्य से भिन्न किसी एक सदस्य द्वारा धारित शेयरों की अधिकतम संख्या किसान-उत्पादक कंपनी की कुल शेयर पूंजी के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • निदेशक मंडल (बी.ओ.डी.) में कम से कम 5 सदस्य होने चाहिए, जिसमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य होगा।
  • विधिवत निर्वाचित एक प्रबंध समिति का होना आवश्यक है।
  • अगले 18 महीनों के लिए एक कारोबार योजना एवं बजट आवश्यक है।

गांरटी की रकम के लिए कैसे करें आवेदन:-

पात्र ऋणदाता संस्था अगली तिमाही के समाप्त होने से पूर्व स्वयं द्वारा स्वीकृत ऋण प्रस्ताव को गारंटी की रकम हेतु लघु कृषक कृषि व्यापार संघ के पास आवेदन कर सकेगी।

ऋण गारंटी की रकम हासिल करने की प्रक्रिया:-

  • पात्र ऋणदाता संस्था 5 वर्ष की अवधि में अधिकतम दो बार किसी एक किसान-उत्पादक कंपनी हेतु स्वीकृत ऋण सुविधा के लिए गारंटी की रकम प्राप्त करने के लिए पात्र होगी।
  • गारंटी की अधिकतम रकम स्वीकृत ऋण सुविधा का 85 प्रतिशत या 85 लाख रूपए तक सीमित होगी।
  • चूक के मामले में 85 फीसदी तक दावे का निपटारा किया जाएगा।
  • पात्र ऋणदाता संस्था द्वारा लघु कृषक कृषि व्यापार संघ के साथ करार करने के बाद ही गारंटी की रकम मंजूर की जाएगी।
  • लघु कृषक कृषि व्यापार संघ द्वारा तय किए गए नियमों एवं शर्तों के अनुसार मंजूरी दी जाएगी।

उपरोक्त योजनाओं की अधिक जानकारी प्राप्त करने हेतु लघु कृषक/कृषि व्यापार संघ एन.सी.यू.आई. आडोटोरियम बिल्डिंग, 5वां तल अगस्तक्रांति मार्ग, हौजखास नई दिल्ली - 110016, दूरभाष - 011-26862365, E-Mail – sfac@nic.in, Website – www.sfacindia.com पर प्राप्त कर सकतें है।


C.पशुधन विकास विभाग, कृषकों के लिये विभागीय योजनायें

बैकयार्ड कुक्कुट ईकाई वितरण योजना

योजना का उद्देश्य -  प्रदेश में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जन जाति / पिछड़ा वर्ग / सामान्य वर्ग के परिवारों के जीवन स्तर में कुक्कुट पालन व्यवसाय से जोड़कर सुधार लाना | 
हितग्राही की पात्रता - अनुसूचित जाति / अनुसूचित जन जाति / पिछड़ा वर्ग / सामान्य वर्ग के हितग्राही | 
इकाई लागत - चूजा / बत्तख इकाई 
45 चूजा की कीमत रु 2250  + खाद्यान रु 450 + पैकिंग एवं परिवहन रु 300, अतः कुल 3000 

बटेर इकाई 
80 बटेर चूजों की कीमत रु 2240  + खाद्यान रु 460 + पैकिंग एवं परिवहन रु 300, अतः कुल 3000
मिलने वाले लाभ -  अनुसूचित जाति / अनुसूचित जन जाति को 90 प्रतिशत एवं पिछड़ा वर्ग के हितग्राहियो को 75 % अनुदान पर २८ दिवसीय 45 रंगीन उन्नत नस्ल के मुर्गी चूजे बतख अथवा 28 दिवसीय 80 बटेर चूजों के साथ कुक्कुट आहार के साथ उपलब्ध कराया जाता है | इस योजना के हितग्राही को औसतन रु 26550 /- वार्षिक लाभ संभावित है | 
संपर्क - निकटस्थ पशु चिकित्सा संस्था / सम्बंधित जिले के संयुक्त /उप संचालक , पशु चिकित्सा सेवाएं |

 

अनुदान पर नर सुकर वितरण 
योजना का उद्देश्य - देशी स्थानीय नस्ल की सुकरो का नस्ल सुधार| मांस उत्पादन में वृद्धि | 
हितग्रही की पात्रता - अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के सुकर पालक 
मिलने वाले लाभ - अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के हितग्रहियों को उन्नत नस्ल का एक नर सुकर 90 प्रतिशत या अधिकतम रु 3500 /- अनुदान (जो भी कम हो ) पर प्रदाय | अनुमानित औसतन रु 16800 /- वार्षिक लाभ | 
पशु क्रय प्रक्रिया - उन्नत नस्ल (मिडिल व्हाइट यार्कशायर) का प्रजनन योग्य एक नर सुकर आयु 06 माह से 01 वर्ष का हितग्रही द्वारा शासकीय सुकर पालन प्रक्षेत्र / स्थानीय तौर पर क्रय करेगा | 
अनुदान का स्वरुप - हितग्रही द्वारा प्रजनन योग्य नर सुकर शासकीय सुकर प्रजनन प्रक्षेत्र या स्थानीय तौर पर क्रय करेगा | सम्बंधित ग्राम पंचायत के सरपंच या नगरीय निकाय के पार्षद एवं स्थानीय पशु चकित्सा सहायक शलयज्ञ एवं स्थानीय सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी से भौतिक सत्यापन कराकर सत्यापित देयक पशु चिकित्सा सहायक शलयज्ञ के माध्यम से विभागीय जिला अधिकारी को प्रस्तुत किया जावेगा| स्थानीय तौर पर नर सुकर क्रय करने की स्थिति में पंचायत शुल्क की रसीद प्रकरण के साथ हितग्राही को जमा करना होगा | अनुदान प्रत्यक्ष लाभ हस्तान्तरण(DBT) अंतर्गत देय होगा |
संपर्क - निकटस्थ पशु चिकित्सा संस्था / सम्बंधित जिले के संयुक्त / उप संचालक , पशु चिकित्सा सेवाएं | 

 

राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना

1. प्रस्तावना -
छत्तीसगढ़ राज्य में डेयरी उद्यमिता की अपार संभावनाएं है। दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की उत्तरोत्तर बढ़ती हुई मांग के दृष्टिगत आपूर्ति सुनिश्चित करने डेयरी इकाई की स्थापना अपरिहार्य है। उन्नत नस्ल गाय/भैंस पालन एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित हो रहा है। युवाओं को डेयरी क्षेत्र में व्यवसाय के अवसर प्रदाय करने के उद्देश्य से राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना लागू की जा रही है। यह योजना न सिर्फ नवीन उद्यमियों को डेयरी इकाई स्थापना हेतु प्रेरित करेगी वरन् वर्तमान में गाय/भैंस पालन कर रहे पशुपालकों को पशुधन संख्या की बढ़ोत्तरी में भी सहायक सिद्ध होगी जिससे राज्य में दुग्ध उत्पादन एवं आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

2. उद्देश्य-

  • स्वच्छ दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से आधुनिक डेयरी फार्म की स्थापना को प्रोत्साहित करना।
  • आजीविका हेतु दुधारू पशुपालन कर रहे कृषकोंको व्यावसायिक (कमर्शियल) स्तर पर दुग्धोत्पादनव्यवसाय करने को प्रोत्साहित करना।
  • प्रदेश के पिछडे़ क्षेत्रों में डेयरी उद्यमिता को व्यावसायिक स्तर पर करने हेतु प्रोत्साहित करना।
  • दुग्ध उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि।

3. योजना घटक एवं अनुदान पात्रता-

क्र. घटक का नाम कुल वित्तीय लागत (रू.लाख मे) सहायता का प्रकार (पूंजी अनुदान)  
      सामान्य श्रेणी हितग्राही हेतु अ.जा./अ.ज.जा. के हितग्राही हेतु
1 भारतीय दुधारू नस्ल की गाय (साहीवाल, रेडसिंधी, गिर, थारपारकर आदि)/ उन्नत संकर नस्ल की गाय/उन्नत नस्ल की भैंस) कुल लागत रु. 9.00 लाख (/ रू. 0.60 लाख प्रति पशु, न्यूनतम 02 पशु एवं अधिकतम 15 पशु) वित्तीय लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम रू. 4.50 लाख 15 पशुओं की इकाई हेतु (02 पशुओं की इकाई हेतु अधिकतम रू. 60,000/- तक पूंजी अनुदान अनुमत्य होगा। पशु संख्या के आधार पर पंूजी अनुदान अनुपातिक रूप से सीमित होगा।) वित्तीय लागत का 66.6 प्रतिशत, अधिकतम रू. 5.994 लाख 15 पशुओं की इकाई हेतु। (2 पशुओं की इकाई हेतु अधिकतम रू. 79,920/- तक पूंजी अनुदान अनुमत्य होगा। पशु संख्या के आधार पर पंूजी अनुदान अनुपातिक रूप से सीमित होगा।)
2    पशु आवास गृह एवं अन्य व्यवस्था- पक्का फ्लोर (न्यूनतम 6'X4' 24वर्गफीट प्रति पशु), फीड टब, मिल्क कैन्, काऊ चैन, बाल्टी, फावड़ा आदि। रू. 1.50 लाख वित्तीय लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम रू. 0.75 लाख वित्तीय लागत का 66.6 प्रतिशत, अधिकतम रू. 0.999 लाख
जल व्यवस्था हेतु- नलकूप खनन, पंप (न्यूनतम 1 एचपी, वाटर टैंक निर्माण न्यूनतम 1000 लीटर क्षमता), प्लास्टिक पाईप 1/2 ईंच 50 फिट आदि। रू. 1.00 लाख वित्तीय लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम रू. 0.50 लाख वित्तीय लागत का 66.6 प्रतिशत, अधिकतम रू. 0.666 लाख
4 वर्मी कम्पोस्ट हेतु - टैंक निर्माण (न्यूनतम 15'X4'X2.5" वर्गफीट) रू. 0.50 लाख वित्तीय लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम रू. 0.25 लाख वित्तीय लागत का 66.6 प्रतिशत, अधिकतम रू. 0.333 लाख

टीप:- डेयरी इकाई हेतु प्रति पशुओं की इकाई लागत नाबार्ड अंतर्गत भारत सरकार कृषि मंत्रालय, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्यपालन विभाग, कृषि भवन, नई दिल्ली के पत्र क्र. एफ 1-1/2009-DP दिनांक 08 मई, 2014 द्वारा सूचित है।

4. गतिविधि/घटक क्रियान्वयन विवरण

4.1. दुधारू पशु क्रय - न्यूनतम 02 पशु एवं अधिकतम 15 पशु क्रय किये जा सकेंगे। सामान्य वर्ग हेतु वित्तीय लागत का 50 प्रतिशत एवं अनु जाति, जनजाति वर्ग हेतु 66.6 प्रतिशत अनुदान, अनुमत्य होगा। अनुदान प्रति पशु राशि रू. 30,000 सामान्य वर्ग हेतु तथा राशि रू. 39,960 अनु.जाति, जनजाति हेतु से अधिक नहीं होगा। योजना की स्वीकृति हेतु इस गतिविधि/घटक का लिया जाना अनिवार्य है।

4.2. पशु आवास गृह एवं अन्य व्यवस्था - पशुओं की आवास व्यवस्था हेतु पक्का फ्लोर (न्यूनतम 6'X4'=24वर्गफीट प्रति पशु), फीड टब, मिल्क कैन्, काऊ चैन, बाल्टी, फावड़ा आदि के लिए प्रति पशु रू. 10,000 प्रावधानित किया गया है, जिसमें से राशि रू. 5,000 अनुदान सामान्य वर्ग हेतु एवं राशि रू. 6,600 अनुदान अनु.जाति, जनजाति हेतु अनुमत्य होगा। हितग्राही के पास पशुओं हेतु आवास एवं अन्य व्यवस्था पूर्व से सुनिश्चित होने की स्थिति में यह गतिविधि ऐच्छिक होगी। गतिविधि/घटक 1 के अनुरूप, पशु संख्या के आधार पर पशु आवास गृह हेतु प्रति पशु राशि प्रावधान अनुसार स्वीकृति एवं अनुदान की पात्रता होगी।

4.3. जल व्यवस्था हेतु नलकूप खनन - इस गतिविधि अंतर्गत निहित कार्यो में ट्यूबवेल खनन, वाटर टैंक (न्यूनतम 1000 लीटर क्षमता) स्थापना, पंप (न्यूनतम 1 एचपी) की स्थापना, प्लास्टिक पाईप 1/2 ईंच 50 फिट आदि शामिल है। इस कार्य हेतु राशि रू. 1.00 लाख प्रावधानित किया गया है, जिसमें से राशि रू. 0.50 लाख अनुदान सामान्य वर्ग हेतु तथा राशि रू. 0.666 लाख अनुदान अनु.जाति जनजाति वर्ग हेतु अनुमत्य होगा। हितग्राही के पास पूर्व से ही जल व्यवस्था उपलब्ध होने की स्थिति में इस आशय का प्रमाण पत्र एवं भौतिक सत्यापन पश्चात योजना लागत में उतनी राशि कम की जा सकेगी या इस राशि का उपयोग अतिरिक्त पशु क्रय करने हेतु किया जा सकेगा। इस आशय की लिखित जानकारी पशुपालक द्वारा बैंक प्रबंधक/विभागीय जिला अधिकारी को उपलब्ध कराने पर केवल गतिविधि/घटक क्र. 1 हेतु योजना स्वीकृत किये जा सकेंगे।

4.4. वर्मी कम्पोस्ट हेतु - इस गतिविधि अंतर्गत वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन हेतु टंकी निर्माण (न्यूनतम 15'X4'X2.5' वर्गफीट) किया जाना शामिल है। इस कार्य हेतु राशि रू. 0.50 लाख प्रावधानित है, जिसमें से राशि रू. 0.25 लाख अनुदान सामान्य वर्ग हेतु तथा राशि रू. 0.333 लाख अनुदान अनु.जाति जनजाति वर्ग हेतु अनुमत्य होगा।

  • योजनांतर्गत निहित प्रावधान से अधिक व्यय हितग्राही द्वारा स्वयं वहन किया जावेगा।
  • योजना की स्वीकृति हेतु गतिविधि/घटक क्र. 1 लिया जाना अनिवार्य होगा एवं गतिविधि/घटक क्र. 2/3/4 यदि पूर्व से ही हितग्राही के पास उपलब्ध है एवं इस आशय की लिखित जानकारी पशुपालक द्वारा बैंक प्रबंधक/विभागीय जिला अधिकारी को उपलब्ध कराने पर केवल गतिविधि/घट                         क क्र. 1 हेतु योजना स्वीकृत किये जा सकेंगे।

5. फंडिंग पैटर्न, योजना का क्रियान्वयन एवं इकाई क्रय हेतु दिशा निर्देश
योजनांतर्गत हितग्राही इकाई को बैंक ऋण के माध्यम से (बैंक लिंकेज) या स्वयं की पूंजी (स्ववित्तीय) से क्रियान्वित किया जा सकेगा। एक हितग्राही को किसी भी एक माध्यम (बैंक लिंकेज या स्ववित्तीय) से ही अनुदान की पात्रता होगी। एक बार अनुदान प्राप्त कर चुके हितग्राही को योजनांतर्गत आगामी अनुदान की पात्रता पूर्व अनुदान प्राप्ति दिनांक के 05 वर्ष पश्चात् होगी-

5.1 बैंक लिंकेज अंतर्गत वांछित अर्हता/प्रावधान/प्रक्रिया-

  • ऋण से लिंकेज बाध्यता होगी।
  • ऋण स्वीकृति एवं वापसी हेतु बैंक से संबंधित समस्त शर्तें लागू होंगी।
  • हितग्राही छत्तीसगढ़ में कम से कम 05 वर्ष से निवास कर रहा हो।
  • रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देश अनुसार ब्याज दर तथा जमानत मानदण्ड लागू होंगे एवं ऋण वापसी की अवधि निर्धारित होगी।
  • इच्छुक हितग्राही द्वारा बैंक ऋण हेतु आवेदन/प्रस्ताव बैंक को प्रस्तुत करना होगा।
  • बैंक से ऋण स्वीकृति उपरांत इकाई स्थापना एवं पशुओं का क्रय निर्धारित मापदण्ड अनुसार हितग्राही द्वारा स्वयं किया जावेगा।
  • दुधारू पशु का दुग्ध उत्पादन क्षमता न्यूनतम 8 लीटर प्रतिदिन होना चाहिए।
  • निर्धारित मापदण्ड के अनुरूप हितग्राही द्वारा दुधारू पशुओं का क्रय उपरांत सत्यापन बैंक द्वारा गठित समिति के माध्यम से किया जावेगा। तदोपरांत स्वास्थ्य प्रमाण पत्र स्थानीय पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ द्वारा जारी किया जावेगा।
  • हितग्राही द्वारा इकाई स्थापना पश्चात् सत्यापन हेतु समिति का गठन वित्त पोषक बैंक के प्रबंधक द्वारा किया जावेगा। समिति में स्थानीय सरपंच/पार्षद, स्थानीय पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, हितग्राही एवं विकासखण्ड स्तरीय कृषि स्थायी समिति के अध्यक्ष सदस्य होंगे एवं संबंधित बैेक के शाखा प्रबंधक/प्रतिनिधि सत्यापन समिति के अध्यक्ष होंगे।
  • बैंक द्वारा ऋण स्वीकृति एवं हितग्राही द्वारा इकाई स्थापना करने के उपरांत ऋण स्वीकृतकर्ता बैंक सत्यापन प्रमाण-पत्र के साथ संबंधित जिले के संयुक्त/उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं को अनुदान विमुक्त करने हेतु मांग पत्र प्रेषित करेगा जिसके आधार पर संबंधित जिले के संयुक्त/उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं अनुदान स्वीकृत कर बैंक को अनुदान राशि देंगे।
  • पशु बीमा 3 से 5 वर्ष की अवधि के लिए होगा। उक्त अवधि में स्थापित इकाई की निरंतरता आवश्यक है।
  • संयुक्त परिवार के 01 ही हितग्राही को अनुदान की पात्रता होगी।
  • हितग्राही इस आशय का पूर्ण विवरण प्रस्तुत करेंगे कि जहां से उन्होने पशु क्रय किये है उस विक्रेता के पास टीकाकरण एवं राज्य/अन्य राज्यों से पशु लाकर विक्रय करने की सुविधा है।
  • हितग्राही के पास पूर्व से पले हुये दुधारु पशुओं को योजनांतर्गत 15 पशुओं की संख्या में शामिल नही किया जावेगा।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति के हितग्राहियों को वर्ग संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

5.2 स्व वित्तीय अंतर्गत वांछित अर्हता/प्रावधान/प्रक्रिया -

  • योजनांतर्गत हितग्राही द्वारा निर्धारित प्रारूप में आवेदन स्थानीय पशु चिकित्सा संस्था को प्रस्तुत किया जावेगा। तत्पश्चात् उक्त प्रस्ताव का त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था अंतर्गत प्रावधान अनुसार अनुमोदन प्राप्त किया जावेगा। सक्षम अधिकारी द्वारा उपलब्ध बंटन व अनुमोदन के आधार पर हितग्राही को स्वीकृति संसूचित की जावेगी। तद्नुसार हितग्राही पशुधन/सामग्री क्रय संपादित करेंगे।
  • हितग्राही द्वारा इकाई स्थापना हेतु आवश्यक भूमि की स्वामित्ता संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने होंगे। किराये की भूमि होने की स्थिति में भू-स्वामी का अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना होगा। न्यूनतम लीज अवधि/किराया अवधि, इकाई स्थापना दिनांक से 10 वर्ष का होना अनिवार्य है।
  • हितग्राही द्वारा योजना स्वीकृति उपरांत इकाई लागत अंतर्गत योजनानुरूप स्वयं की राशि से पशु/सामग्री क्रय की कार्यवाही की जाएगी।
  • प्रकरण स्वीकृति उपरांत इकाई स्थापना एवं पशुओं का क्रय निर्धारित मापदण्ड अनुसार हितग्राही द्वारा स्वयं किया जावेगा। पशु क्रय की कार्यवाही छ.ग. कृषक पशु परीरक्षण अधिनियम 2014 के तहत् दिये गये दिशा निर्देशो का पालन करते सुनिश्चित करते हुये की जाये।
  • हितग्राही के पास पूर्व से पले हुये दुधारु पशुओं को योजनांतर्गत 15 पशुओं की संख्या में शामिल नही किया जावेगा।
  • संयुक्त परिवार के 01 ही हितग्राही को अनुदान की पात्रता होगी।
  • दुधारू पशु का दुग्ध उत्पादन क्षमता न्यूनतम 8 लिटर प्रतिदिन होना चाहिए।
  • हितग्राही छत्तीसगढ़ में कम से कम 05 वर्ष से निवास कर रहा हो।
  • हितग्राही के पास पूर्व से ही जल व्यवस्था उपलब्ध होने की स्थिति में इस आशय का प्रमाण पत्र एवं भौतिक सत्यापन पश्चात योजना लागत में उतनी राशि कम की जा सकेगी या इस राशि का उपयोग अतिरिक्त पशु क्रय करने हेतु किया जा सकेगा। इस आशय की लिखित जानकारी पशुपालक द्वारा विभागीय जिला अधिकारी को उपलब्ध कराने पर केवल गतिविधि/घटक क्र.-1 हेतु योजना स्वीकृत किये जा सकेंगे।
  • हितग्राही द्वारा अनुदान प्राप्ति हेतु वांछित दस्तावेज/प्रपत्र स्थानीय पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ/सहायक पशु क्षेत्र अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा प्राप्त प्रस्ताव का परीक्षण कर प्रस्ताव विकास खंड के पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के माध्यम से विभागीय जिला अधिकारी को प्रेषित किया जावेगा।
  • हितग्राही द्वारा इकाई स्थापना पश्चात् सत्यापन समिति में स्थानीय सरपंच/पार्षद, स्थानीय पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ, हितग्राही सदस्य होंगे एवं विकासखण्ड स्तरीय कृषि स्थायी समिति के सभापति सत्यापन समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति द्वारा सत्यापन उपरांत ही हितग्राही अनुदान प्राप्त कर सकेगा।
  • स्थापित इकाई के सत्यापन उपरांत सत्यापन प्रमाण-पत्र संबंधित विकासखण्ड के पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के माध्यम से संबंधित जिले के संयुक्त/उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं को प्रस्तुत किये जावेंगे। तत्पश्चात् हितग्राही के बैंक खाता में अनुदान राशि डी.बी.टी. की जावेगी।
  • अनुदान की राशि इकाई की पूर्णता के सत्यापन उपरांत हितग्राही के बैंक खाते में डी.बी.टी. के माध्यम से जारी की जावेगी। हितग्राहियों को अनुदान राशि प्राप्ति हेतु निम्न दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा-
  1. पशुधन/सामग्री क्रय संबंधी दस्तावेज जो कि सत्यापन समिति द्वारा सत्यापित हो।
  2. बीमा संबंधी दस्तावेज। पशु बीमा 3 से 5 वर्ष की अवधि के लिए होगा। उक्त अवधि में स्थापित इकाई की निरंतरता आवश्यक है।
  3. क्रयित पशु में कृत टीकाकरण प्रमाण पत्र एवं विक्रेता छ.ग. कृषक पशु परीरक्षण अधिनियम के तहत् प्राधिकृत का प्रमाण पत्र।
  4. हितग्राही एवं दो गवाह द्वारा हस्ताक्षरित अनुबंध पत्र। हितग्राही द्वारा इकाई को कम से कम 5 वर्ष तक संचालित किया जाना होगा। इस संबंध में एक अनुबंध हितग्राही एवं विभाग के बीच में संपादित किया जाना होगा।
  5. बैंक खाते का विवरण।
  6. जाति प्रमाण पत्र। अनुसूचित जाति/जनजाति के हितग्राहियों को वर्ग संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा
  7. पता एवं पहचान पत्र।

D. मछली पालन विभाग की हितग्राही मूलक योजनाए

योजना मत्स्य बीज उत्पादन-
उद्देश्य-
 
आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित विधि से मत्स्य बीज उत्पादन कर विभागीय व निजी क्षेत्र की मत्स्य बीज मांग पूर्ति करना ।
मिलने वाला लाभ                           सामान्य और आदिवासी क्षेत्र के विभागीय मत्स्य बीज उत्पादन इकाइयों (हैचरी, मत्स्य बीज प्रक्षेत्र संवर्धन इकाई आदि) से आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक पर विभागीय तौर पर मत्स्य बीज उत्पादन कर विभागीय व निजी क्षेत्र की मांगपूर्ति करना योजना का मुख्य उद्देश्य है । उत्पादित मत्स्य बीज का उपयोग, विभागीय जलाशयों में संचयन, नदियों में संचयन आदि के अतिरिक्त निजी मत्स्य पालकों/मछुआ सहकारी समितियों आदि को विक्रय हेतु किया जाता है ।

 

योजना जलाशयों एवं नदियों में मत्स्योद्योग का विकास
उद्देश्य-
 
जलाशयों में मत्स्योद्योग का विकास कर मत्स्य उत्पादकता बढ़ाना एवं नदियों में मत्स्य बीज संचयन ।
मिलने वाला लाभ                           मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देना तथा मत्स्य प्रजनन, अनुसंधान एवं प्रषिक्षण आदि आवश्यकताओं की पूर्ति के उद्देष्य से सामान्य एवं आदिवासी क्षेत्र के विभागीय जलाशयों का प्रबंधन एवं मत्स्य पालन विकास मत्स्योद्योग विभाग द्वारा किया जा रहा है । राज्य में प्रवाहित नदियों में प्रग्रहण मात्स्यिकी (केप्चर फशरीज) अन्तर्गत अत्यल्प हो गये मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु इन नदियों में उत्तम गुणवत्ता वाले मत्स्य भण्डारण को पुनः स्थापित करने के उद्देष्य से आदिवासी बाहुल्य बस्तर क्षेत्र के इन्द्रावती तथा शबरी नदी में प्रतिवर्ष मत्स्य बीज संचयन कार्यो के लिए अन्य प्रभार, अनुरक्षण एवं लघु निर्माण मद में व्यय करने का प्रावधान होता है। 0-10 हैक्ट., 10 हैक्ट से ऊपर तथा 100 हैक्ट तक, 100 हैक्ट से ऊपर तथा 200 हैक्ट तक, 200. से ऊपर 1000 हे. तक एवं 5000 हे. से ऊपर औसत जलक्षेत्र के जलाषय क्रमषः ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत एवं विभाग द्वारा पट्टे पर शासन की नीति अनुसार दिए जा रहे हैं। 1000 हे. से 5000 हे. तक के जलाषय मत्स्य महासंघ को रायल्टी आधार पर मत्स्यपालन के लिए दिए गए हैं।

 

योजना शिक्षण प्रशिक्षण ( मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण)
उद्देश्य-
 
सभी श्रेणी के मछुआरों को मछली पालन की तकनीक एवं मछली पकड़ने, जाल बुनने, सुधारने एवं नाव चलाने का प्रशिक्षण प्रदान करना।
मिलने वाला लाभ                           सामान्य/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के मछुआरों को मछली पालन की तकनीकी एवं मछली पकड़ने जाल बुनने, सुधारने एवं नाव चलाने का प्रशिक्षण तहत् 10 दिवसीय सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत अन्य प्रभार मद में राषि व्यय की जाती है । प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण व्यय रू. 1250/- स्वीकृत है, जिसके अन्तर्गत रू. 75/- प्रतिदन प्रति प्रशिक्षणार्थी के मान से शिष्यवृत्ति, रू. 400/- की लागत मूल्य का नायलोन धागा तथा रू. 100/- विविध व्यय अंतर्गत शामिल है।

 

योजना शिक्षण-प्रशिक्षण (मछुआरों का अध्ययन भ्रमण)-
उद्देश्य-
 
प्रगतिशील मछुआरो को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजना ।
मिलने वाला लाभ                           सामान्य/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु देष के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही मछली पालन तकनीकी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रति मछुआरा रू. 2500/- की लागत पर 10 दिवसीय अध्ययन भ्रमण प्रशिक्षण पर व्यय किया जाता है । स्वीकृत योजनानुसार प्रति प्रशिक्षणार्थी रू. 1000/- शिष्यवृत्ति, रू. 1250/- आवागमन व्यय तथा रू. 250/- विविध व्यय का प्रावधान है ।

 

योजना रिफ्रेशर कोर्स
उद्देश्य-
 
मछुआरे जिन्हें शासकीय या पंचायत के माघ्यम से तालाब/जलाशय आबंटित हेैं अथवा स्वयं के तालाब हैं वे मछली पालन का तकनीकि ज्ञान प्राप्त करने हेतु प्रषिक्षण ले सकते है ।
मिलने वाला लाभ                           सभी वर्ग के पूर्व से प्रशिक्षित मछुआरों को पुनः उन्नत मछली पालन का प्रशिक्षण देने हेतु एवं मछली पालन तकनीकी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रति मछुआरा रू. 1000/- की लागत पर 03 दिवसीय रीफ्रेशर कोर्स प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रति मछुआरा रू 150 प्रति दिवस, क्षेत्रीय भ्रमण एवं प्रशिक्षण स्थल तक आने जाने का व्यय रू 550 प्रति हितग्राही व्यय किया जाता है।

 

योजना पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों को ऋण/अनुदान-
उद्देश्य-
 
सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों यथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव-जाल आदि हेतु पात्रतानुसार अनुदान उपलब्ध करवाना।
मिलने वाला लाभ                           योजनान्तर्गत लगातार 3 वर्षो में अधिकतम रूपये 3,00,000/- की सहायता राशि प्रति सहकारी समिति आईटमवार सीमा के अधीन दिए जाने का प्रावधान है। पट्टा राशि पर रूप्ये 50,000 मत्स्य बीज क्रय एवं संचय पर रूप्ये 70,000 मत्स्याखेट उपकरण एवं परिपूरक आहार पर रूपये 1,80,000 दिये जाते है।

 

योजना मत्स्य पालन प्रसार (झींगा पालन)
उद्देश्य-
 
मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करना।
मिलने वाला लाभ                           अनुसूचित जाति/जन जाति के मत्स्य पालकों को मीठे जल में पाॅलीकल्चर झींगा पालन तथा आलंकारिक मत्स्योद्योग विकास की प्रसार योजनान्तर्गत नई योजना क्रियान्वित होगी जिसके तहत् हितग्राहियों को वस्तु विषय के रूप में क्रमशः रू. 15000/- एवं 12000/- का तीन वर्षो में आर्थिक सहायता (अनुदान) देना प्रावधानित किया गया है ।

 

योजना मत्स्य पालन प्रसार (मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन)
उद्देश्य-
 
छोटे मौसमी तालाबों, पोखरों को उपयोगी बनाकर मत्स्य बीज संवर्धन कर आय में वृद्धि करना ।
मिलने वाला लाभ                           मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन कर मत्स्य बीज विक्रय से स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 0.5 हेक्टर के तालाब में प्रति हितग्राहियों को मत्स्य बीज संवर्धन, तालाब सुधार एवं इनपुट्स मत्स्य बीज आदि हेतु रू. 30000/- की आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी जाती है ।

 

योजना मत्स्य पालन प्रसार (नाव जाल या जाल क्रय सुविधा)
उद्देश्य-
 
सभी श्रेणी के मछुआरों को मत्स्याखेट हेतु सहायता प्रदान करना ।
मिलने वाला लाभ                           तालाबों, जलाषयों अथवा नदियों में मत्स्याखेट करने वाले अनुसूचित जाति के सक्रिय मछुआरों को नाव, जाल उपकरण क्रय करने हेतु प्रति मछुआरा रू. 10000/- की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता वस्तु विशेष के रूप में दी जाती है।

 

योजना मत्स्य पालन प्रसार (फिंगर लिंग क्रय कर संचयन पर सहायता)
उद्देश्य-
 
तालाबों मं फिंगरलिंग क्रय कर संवर्धन कर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना । अधिक मत्स्य उत्पादन से अधिक आय अर्जित करना ।
मिलने वाला लाभ                           मत्स्य कृषकों द्वारा वर्तमान में संचित मत्स्य बीज अर्थात् 10000 फ्राई प्रति हैक्टर के स्पान पर क्रय कर 5000 फिंगर लिंग प्रति हैक्टर डालकर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी साथ ही आहार आय अधिक होगी । एैसी स्थिति में मत्स्य कृषक को पांच वर्षो तक रू 2000/- प्रति वर्ष कुल रूपये 1000/-की सहायता प्रदान की जाती है ।

 

योजना श्रीमती बिलासाबाई केंवटिन मत्स्य विकास पुरूस्कार
उद्देश्य-
 
मत्स्य पालन के क्षेत्र में कार्यरत प्रगतिशील मत्स्य कृषकों को प्रोत्साहित करना ।
मिलने वाला लाभ                           मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति/संस्था/समूह को रू. 1.00 लाख का पुरस्कार दिए जाने हेतु प्रावधान अंतर्गत व्यय होता है। पुरस्कार प्रतिवर्ष एक व्यक्ति/संस्था/समूह के लिए प्रावधानित किया जाता है ।

 

योजना प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना अन्र्तगत मत्स्य जीवियों का दुर्घटना बीमा
उद्देश्य-
 
मछुआरों की मत्स्य पालन एवं मत्स्याखेट के दौरान दुर्घटना होने पर उनके परिवार को सहायता प्रदान करना ।
मिलने वाला लाभ                           केन्द्र प्रवर्तित योजनान्तर्गत केन्द्र: राज्य के 50: 50 के आनुपातिक अंशदान से योजना संचालित होती है । वर्तमान में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना अन्र्तगत मत्स्यजिवियों का दुर्घटना बीमा फिशकोपफेड नई दिल्ली के माध्यम से कराया जा रहा हैं। योजनान्तर्गत मत्स्यजीवी दुर्घटना बीमा के संबंध में वार्षिक बीमा प्रीमियम राशि रू. 12 प्रति हितग्राही के मान से (केन्द्र व राज्य का बराबर-बराबर अंशदान अर्थात् रू. 06.00 केन्द्रांश तथा रू. 06.00 राज्यांश) व्यय का प्रावधान है । राज्यांश राषि रूपये 06.00 प्रति हितग्राही के मान से बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से ‘‘फिशकोफेड‘‘ नई दिल्ली को प्रेषित की जाती है । फिषकोफेड केन्द्रांश राषि रू. 06.00 प्रति हितग्राही राज्यंाश राशि में जोड़कर प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना अन्र्तगत सीधे बीमा कम्पनी को जमा कराती है । बीमित मछुआरों का मत्स्य पालन/मत्स्याखेट के दौरान दुर्घटना की स्थिति में अस्थाई अपंगता पर रू. 1,00,000/- तथा स्थाई अपंगता अथवा मृत्यु पर रू. 2,00,000/- का बीमा लाभ प्राप्त होता है

 

योजना राष्ट्र्रीय कृषि विकास योजना
उद्देश्य-
 
1. मांग अनुरूप मत्स्य बीज की आपूर्ति हेतु नवीन हेचरियों का निर्माण, वर्तमान शासकीय हैचरी एवं प्रक्षेत्रों का पुनरूद्धार, मत्स्य बीज संवर्धन हेतु अतिरिक्त जलक्षेत्र का विकास ।
2. मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता हेतु इनपुट्स का प्रयोग ।
3. अतिरिक्त जलक्षेत्र के विकास हेतु स्वयं की भूमि पर तालाब निर्माण ।
4. मत्स्य पालकों का विकास के सह प्रशिक्षण, अनुसंधान, प्रचार-प्रसार कार्यक्रम का विस्तार ।
5. मत्स्य पालकों एवं सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण हेतु मत्स्याखेट कार्य के लिए नाव-जाल के लिए आर्थिक सहायता ।
मिलने वाला लाभ                          

यह योजना वर्ष 2007-08 से भारत शासन की सहायता से छत्तीसगढ़ राज्य में लागू की गई है । योजना अंतर्गत निम्न कार्यक्रमों के माध्यम से हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है । यह योजना वर्ष 2008-09 से क्रियान्वित की गई है:-

1/ मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन - रूपये 30,000/-

2/ स्वयं की भूमि पर तालाब निर्माण - तालाब निर्माण पर अधिकतम रूपये 2,00,000 लाख तथा इनपुटस पर अधिकतम रूपये 80,000/- कुल 2,80,000/- । -

3/ तालाबों में अंगुलिका संचयन - रूपये 3000/-

4/ तालाबों में प्रदर्शन इकाई की स्थापना - अधिकतम रूप्ये 1,11,000/-

5/ मत्स्य सहकारी समितियों को रूपये 1.00 लाख 6/ फुटकर मत्स्य विक्रय - रूपये 4500/-

 

योजना बचत सह राहत योजना
उद्देश्य-
 
जलाशयों में प्रत्यक्ष रूप से मत्स्याखेट में संलग्न मछुआरों को बंद ऋतु में सहायता पहुंचाना ।
मिलने वाला लाभ                           बंद ऋतु में मत्स्याखेट पर प्रतिबंध के कारण रोजगार से वंचित मछुआरों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने हेतु योजना क्रियान्वित की जा रही है । योजना क्रियान्वयन का 50 प्रतिशत राज्य शासन एवं 50 प्रतिशत केन्द्र शासन द्वारा व्यय वहन किया जाता है । योजनान्तर्गत मछुआरों द्वारा 9 माह में रू. 1500/- तथा राज्य एवं केन्द्र शासन द्वारा अंशदान रू. 1500/- कुल रू. 4500/- हितग्राही के नाम से बैंक में जमा किये जाते हैं जिन्हें बंद ऋतु के 3 माह में 1500 रू. मासिक आर्थिक सहायता के रूप में हितग्राहियों को प्रदाय किये जाते हैं।

 

योजना मछुआ आवास योजना
उद्देश्य-
 
जलाशयों में मत्स्याखेट करने वाले मछुओ को जलाशयों के समीप रहने एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना।
मिलने वाला लाभ                           जलाशयों पर मत्स्याखेट करने वाले सक्रिय मछुआरों को मूलभूत सुविधाएॅ यथा - आवास, उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जलाशय के समीप ही आवास बनाकर मछुआरों को बसाया जाता है । योजनान्तर्गत मछुआ आवास पर रू. 1,20,000/-प्रति आवास निर्माण हेतु व्यय का प्रावधान है । योजनान्तर्गत केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा 50-50 प्रतिशत के अनुपात में व्यय भार वहन किया जाता है ।

 

योजना नीलक्रांति योजना
उद्देश्य-
 
भारत शासन द्वारा केन्द्र प्रवर्तित, केन्द्र क्षेत्र योजना, कार्यक्रम को नवीन योजना नील क्रांति के तहत समाहित कर नील क्रांति कार्यक्रमों के घटकों से राज्य में मत्स्य पालन विकास एवं प्रबंधन कार्यक्रमों के अंतर्गत मत्स्य पालन से जुड़ने वाले हितग्राहियों को आर्थिक सहायता प्रदाय की जाती है।
अनुदान की पात्रता                       नील क्रांति योजना अंतर्गत अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं महिला हितग्राहियों को 60ः तथा सामान्य हितग्राहियों को 40ः सीमा तक अनुदान देने का प्रावधान है। योजना का विवरण निम्नानुसार है:-
मिलने वाला लाभ
क्र. कार्यक्रम हितग्राहियों को मिलने वाला लाभ (यूनिट कास्ट)
1 मत्स्य बीज उत्पादन हेतु सरकुलर हैचरी की स्थापना रूपये 25.00 लाख प्रति इकाई
2 अन्तर्देशीय मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर का विकास (तालाबों के जीर्णोद्धार एवं इनपूट्स हेतु राशि) कुल रूपये 05.00 लाख (तालाबों के जीर्णोद्धार हेतु रूपये 3.50 लाख एवं इनपुट्स हेतु रूपये 1.50 लाख)
3 मत्स्य बीज संवर्धन पोखर का निर्माण रूपये 6.00 लाख प्रति इकाई
4 आटोरिक्शा के साथ आईस बाक्स रूपये 2.00 लाख प्रति इकाई
5 मोटर सायकल के साथ आईस बाक्स रूपये 0.60 लाख प्रति इकाई
6 सायकल के साथ आईस बाक्स रूपये 0.03 लाख प्रति इकाई
7 स्वयं के जमीन पर नवीन तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन रूपये 7.00 लाख प्रति हैक्टेयर

 

 

E.निदेशालय विस्तार सेवायें, इंदिरा गाॅधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा संचालित योजनाऐं/कार्यक्रम

  • मासिक कार्यशाला का आयोजन:- निदेशालय विस्तार एवं विभिन्न जिलों में कार्यरत कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा कृषि अधिकारियों हेतु मासिक कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। जिसमें कि वैज्ञानिकों द्वारा कृषि अधिकारियों की समसामयिक समस्या का निदान एवं विश्वविद्यालय द्वारा विकसित उन्नत तकनीक के बारे में बताया जाता है।
  • किसानों के खेतों पर अनुसंधान परीक्षण:- चयनित क्षेत्र विशेष में फसलों की उपज कम होने का कारण ज्ञात कर, उत्पादन बढ़ाने हेतु कृषकों के खेतों पर केन्द्र द्वारा अनुसंधान परीक्षण आयोजित किया जाता है। कृषि की नवीन तकनीकी को प्रक्षेत्र तथा कृषकों के खेतों पर परीक्षण कर अन्य सभी कृषकों तक पहॅुचाया जाता है।
  • अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन का आयोजन:- कृषि विज्ञान केन्द्रांे द्वारा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई विभिन्न फसलों की नवीन किस्मों एवं क्षेत्र विशेष के लिए अनुशंसित किस्मों एवं उन्नत कृषि तकनीकी का प्रदर्शन किसानों के खेतों पर क्रियान्वयन कर प्रसार किया जाता है।
  • प्रसार कार्यकर्ताओं हेतु प्रशिक्षण:- कृषि, पशुधन विकास एवं ग्रामीण विकास में लगे हुए विभिन्न विभागों के कार्यकर्ता जैसे ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, उद्यान विस्तार अधिकरी, आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता, कृषक संगवारी आदि को उनके संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है जिससे इन कार्यकर्ताओं को संबंधित विषयों पर नवीन तकनीकी की जानकारी हो सके एवं वे इनका प्रसार कर सके।
  • कौशल प्रशिक्षण:- कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किसानों को विभिन्न विषयों जैसे- मशरूम उत्पादन, मशरूप प्रसंस्करण, वर्मीकम्पोस्ट, सब्जियों की खेती, बीजोत्पादन तकनीक फलों एवं सब्जियों के प्रसंस्करण तकनीक इत्यादि विषयों पर 15 से 30 दिनों का कौशल प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है जिससे कि किसान स्वयं का रोजगार प्रारंभ कर सकें।
  • कृषकों, कृषक महिलाओं एवं ग्रामीण युवकों हेतु अल्पकालीन प्रशिक्षण:- खेती के काम धंधें में लगे हुए लोगों के लिए अल्पकालिक (1-2 दिन) का प्रशिक्षण दिया जाता है, ये प्रशिक्षण कार्यक्रम लोगों की आवश्यकता पर आधारित होते है। इसका उद्देश्य कृषकों की कार्यकुशलता व क्षमता को बढ़ाना है, जिससे किसानों के सामाजिक एवं आर्थिक स्तर में सुधार हो सके। कृषकों को विभिन्न समूहों में फसलों से अच्छा उत्पादन लेने की उन्नत तकनीकी, फलदार बगीचे की स्थापना, कीट व बीमारियों से बचाव हेतु उपाय, केंचुए से खाद बनाना, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, उन्नत कृषि यंत्रों के खेती में प्रयोग, मछलीपालन, जैम, जैली, आचार-मुरब्बा बनाना आदि रोजगार मूलक विषयों पर केन्द्र तथा ग्रामों में प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • कृषि विज्ञान केन्द्रों में प्रदर्शन इकाईयों का निर्माण एवं प्रशिक्षण:- कृषि से संबंधित अन्य व्यवसाय जैसे - मधुमक्खी पालन, बकरी पालन, मशरूम उत्पादन, मछली पालन इत्यादि इकाई की स्थापना कृषि विज्ञान केन्द्रों में की गई है। इनके द्वारा किसानों को इन विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है। इन केन्द्रों में नाडेप, केचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) की इकाई का निर्माण भी किया गया है जिनके द्वारा किसानों को जैविक खाद बनाने के तरीके एवं उनके उपयोग की विधि किसानों को सिखाई जाती है। कृषि विज्ञान केन्द्रों में समन्वित कृषि प्रणाली का माॅडल निर्माण किया गया है। जिसके द्वारा किसानों को इसका प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम:- कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किसानों की खेत की मिट्टी की नमूने की जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाकर किसानों को दिया जा रहा है। जिससे कि किसान संतुलित उर्वरकों को उपयोग कर कम खर्च में अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे तथा भूमि की उर्वरकता बरकरार रहेगी।
  • किसान मेला का आयोजन:- निदेशालय विस्तार सेवायें, इंदिरा गाॅधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा राष्ट्रीय किसान मेला/ पश्चिम क्षेत्रीय किसान मेला का आयोजन किया जाता है तथा देश के अन्य राज्यों में आयोजित किसान मेला में भाग लिया जाता है एवं विश्वविद्यालय में चल रही गतिविधियों की प्रदर्शनी लगायी जाती है। विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से समय-समय पर ब्लाक तथा जिला स्तरीय किसान मेला सह प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है जिसमें वृहद पैमाने पर अंचल के किसान तथा विभिन्न शासकीय, गैर शासकीय संस्था तथा कृषि से जुड़े हुए विभिन्न निजी प्रतिष्ठान भाग लेते है।
  • कृषि ज्ञान पोर्टल:- विस्तार निदेशालय द्वारा कृषकों के लिये कृषि ज्ञान पोर्टल का विकास किया गया है, जिसमें कृषि से संबंधित विभिन्न उन्नत तकनीकी समाहित की गई है। यथा फसल उत्पादन, कीट व्याधि, खरपतवार नियंत्रण तथा कृषि अभियंत्रीकरण सम्मिलित है। कृषि ज्ञान पोर्टल को विश्वविद्यालय की वेबसाइट ूूूण्पहंनण्मकनण्पद से संलग्नित किया गया है, जिसे कोई भी लाॅग आॅन कर सूचनायें प्राप्त कर सकता है। इसमें अनाज, दलहन तिलहन एवं उद्यानिकी फसलों की उत्पादन तकनीकी व अन्य पहलुओं का विस्तृत समावेश किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य शासन की कृषि संबंधित विभाग द्वारा चलाई जा रही है विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है।
  • कृषि साहित्य का प्रकाशन:- समय-समय पर कृषि उपयोगी तकनीकी सामग्री प्रकाशित की जाती है। इनमें कृषि पंचांग (वार्षिक), कृषि दर्शिका (वार्षिक), छत्तीसगढ़ खेती (त्रैमासिक पत्रिका), तकनीकी प्रसार पत्रिकाऐं, खरीफ, रबी, सब्जी एवं मसाला की प्रमुख फसलों की कृषि कार्यमाला एवं अन्य विषयों पर बुलेटिन प्रकाशित की जाती है। उक्त प्रकाशन निदेशालय द्वारा प्रकाशित किये जाते है जो कृषकों, मैदानी कृषि अधिकारियों तथा कृषि छात्रों आदि के लिये अत्यंत उपयोगी है। कृषि विज्ञान केन्द्रों से क्षेत्र की आवश्यकताओं अनुसार प्रमुख फसलों की कृषि कार्यमाला एवं अन्य विषयों पर बुलेटिन प्रकाशित की जाती है। साथ ही प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र से कृषि उपयोगी त्रैमासिक पत्रिका इंदिरा किसान मितान का प्रकाशन किया जाता है।
  • किसान मोबाईल संदेश:- प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र से चयनित किसानों एवं संगवारियों को कृषि उपयोगी समसामयिक संदेश प्रति सप्ताह दो बार किया जाता है। जिसमें फसलों में लगने वाले कीट, रोगों एवं अन्य विषयों पर तकनीकी सलाह हिन्दी में एम.एम.एस. द्वारा दी जाती है।
  • सीड हब:- सीड हब योजनांतर्गत इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, कांकेर, राजनांदगांव, कवर्धा, बेमेतरा, भाटापारा, जांजगीर-चाॅंपा, सरगुजा एवं कृषि महाविद्यालय, जगदलपुर तथा भाटापारा के माध्यम से विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रक्षेत्रों एवं चयनित कृषकों के खेतों में विभिन्न दलहन, तिलहन एवं लघु धान्य फसलों का बीजोत्पादन कार्यक्रम लिया जा रहा है। वर्ष 2017-18 में 3763 क्ंिवटल बीज का उत्पादन कर कृषकों को उपलब्ध कराया गया।

 

 

 


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